कौन हैं शांतनु देव? TMC बागियों के नए ठिकाने में मचा सियासी घमासान
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कोलकाता की राजनीति इन दिनों एक बड़े बवंडर से गुजर रही है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 सांसदों का एक साथ पार्टी छोड़कर नेशनललिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल होना बंगाल की सियासत के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है। लेकिन इस विलय ने जितना राजनीतिक हलचल पैदा की है, उससे कहीं ज्यादा विवाद पार्टी के अंदरूनी कलह को लेकर छिड़ गया है।

NCPI में वर्चस्व की जंग जैसे ही टीएमसी के बागी नेताओं ने एनसीपीआई का दामन थामा, पार्टी के भीतर दावेदारी को लेकर संग्राम शुरू हो गया। इस पूरे घटनाक्रम में शांतनु देव का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है। दावा किया जा रहा था कि शांतनु देव इस पार्टी के संस्थापक सदस्य हैं, लेकिन अब पार्टी की संस्थापक श्वेली कुंडू ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है।

श्वेली कुंडू का कड़ा रुख बुधवार को श्वेली कुंडू ने प्रेस वार्ता में साफ कर दिया कि शांतनु देव न तो पार्टी के संस्थापक हैं और न ही उनके पास ऐसा कोई सबूत है। उन्होंने कहा, जो लोग आधारहीन दावे कर रहे हैं, उन्हें जनता के सामने सच रखना चाहिए। इस बयान ने एनसीपीआई के भीतर चल रहे गहरे विवाद को जगजाहिर कर दिया है।

बागी सांसदों के लिए बढ़ी मुश्किलें? सवाल यह उठता है कि क्या टीएमसी के 20 सांसदों ने गलत दांव खेल दिया है? जिस पार्टी में वे अपनी आजादी खोजने गए थे, वहां पहले से ही अध्यक्ष पद और विरासत को लेकर रस्साकशी चल रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि पार्टी अपने आंतरिक विवादों को नहीं सुलझा पाती है, तो इन दिग्गजों का राजनीतिक भविष्य खतरे में पड़ सकता है।

अगले 48 घंटे बेहद निर्णायक श्वेली कुंडू ने ऐलान किया है कि पार्टी का नया अध्यक्ष चुन लिया गया है और अगले 1-2 दिनों में सारी गोपनीयता से पर्दा उठ जाएगा। अब सबकी निगाहें इसी बात पर टिकी हैं कि क्या नए नेतृत्व के आने से पार्टी में शांति आएगी या फिर यह नया विवाद और गहराएगा?

क्या यह विलय टीएमसी के लिए वाकई बड़ी मुसीबत बनेगा या फिर यह सिर्फ एक सियासी ड्रामा बनकर रह जाएगा? आने वाले 48 घंटे यह तय करेंगे कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में NCPI एक मजबूत विकल्प बनकर उभरेगी या फिर यह शुरुआत से पहले ही बिखर जाएगी। फिलहाल, कोलकाता की राजनीति हर पल एक नई करवट ले रही है।

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