हाल ही में भारत ए और श्रीलंका ए के बीच मुकाबले में युवा खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी का आक्रामक बर्ताव चर्चा का विषय बन गया। मैदान पर उनके गुस्से को लेकर क्रिकेट जगत में बहस छिड़ गई है कि क्या युवा जोश में संयम खोना जायज है। लेकिन अगर क्रिकेट के इतिहास में आक्रामकता और विवाद की बात हो, तो पाकिस्तान के दिग्गज जावेद मियांदाद से बड़ा नाम कोई नहीं हो सकता।
मियांदाद का नाम आते ही फैंस को 1986 का वह ऐतिहासिक छक्का याद आता है, लेकिन उनका करियर ऐसे किस्सों से भरा है जिन्होंने खेल को कभी मैदान-ए-जंग तो कभी कॉमेडी शो बना दिया।
1981 में पर्थ टेस्ट के दौरान क्रिकेट इतिहास की सबसे बड़ी भिड़ंत देखने को मिली। मियांदाद और ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाज डेनिस लिली के बीच का तनाव चरम पर था। एक रन लेने के दौरान जब दोनों की टक्कर हुई, तो लिली ने मियांदाद के पैड पर पैर मारा और अपशब्द कहे। जवाब में मियांदाद ने जो किया, उसने दुनिया को हैरान कर दिया—उन्होंने अपना बल्ला हवा में लहराकर लिली को धमकाया। उस दौर में गेंदबाज को बल्ला दिखाना कल्पना से परे था।
1992 विश्व कप में भारत-पाकिस्तान मैच के दौरान भारतीय विकेटकीपर किरण मोरे की लगातार कीपिंग और अपील से परेशान होकर मियांदाद ने जो किया, वह आज भी मीम्स का हिस्सा है। मियांदाद ने ठीक मोरे के सामने अपना संतुलन खोने का नाटक करते हुए तीन बार फ्रॉग जंप (मंकी जंप) लगाई। इस हरकत ने पूरे स्टेडियम को स्तब्ध कर दिया था।
मियांदाद सिर्फ बल्लेबाजी ही नहीं, बल्कि विपक्षी खिलाड़ियों का मानसिक संतुलन बिगाड़ने में भी उस्ताद थे। सुनील गावस्कर एक किस्सा सुनाते हैं कि कैसे मियांदाद गेंदबाज के पास जाकर तुतलाती आवाज में पूछते थे— तेरा लुम नंबर (रूम नंबर) क्या है? जब गेंदबाज परेशान होकर पूछता कि क्यों, तो मियांदाद का जवाब होता— क्योंकि तेरे रूम में मेरे को सिक्स मारना है।
कभी वह क्रीज पर भौं-भौं की आवाज निकालकर गेंदबाजों को चिढ़ाते थे, तो कभी विकेट के पीछे मौजूद विकेटकीपर को अपने अजीबोगरीब सवालों से परेशान कर देते थे।
विवादों के बावजूद, मियांदाद की महानता पर सवाल नहीं उठाया जा सकता। 19 साल की उम्र में सबसे कम उम्र में दोहरा शतक जड़ने का रिकॉर्ड आज भी उनके नाम है। उन्होंने 124 टेस्ट मैचों में 50 से अधिक की औसत से 8832 रन बनाए। वह न केवल पाकिस्तान के सबसे बड़े बल्लेबाज बने, बल्कि आईसीसी हॉल ऑफ फेम में भी जगह बनाई।
वैभव सूर्यवंशी जैसे युवा खिलाड़ियों के लिए यह समझना जरूरी है कि क्रिकेट में आक्रामकता और बदतमीजी के बीच एक महीन लकीर होती है। मियांदाद की कहानी बताती है कि आप मैदान पर विवादों के केंद्र में रहकर भी एक महान खिलाड़ी बन सकते हैं, बशर्ते आपका बल्ला भी उतनी ही आक्रामकता से बोल रहा हो।
Javed Miandad vs Dennis Lillee🔥
— Classic Cricket Clips (@ClassicCrickMP4) January 26, 2026
the moment cricket nearly turned into a battlefield pic.twitter.com/zsYWYrrZdw
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