पीएम मोदी-ट्रंप मुलाकात से पहले अमेरिका का बड़ा झटका, रणनीतिक नाम से ‘इंडो’ शब्द हटाकर बदला रुख
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वॉशिंगटन/हवाई: फ्रांस में होने वाले G7 शिखर सम्मेलन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रस्तावित द्विपक्षीय बैठक से ठीक पहले अमेरिका ने भारत को एक बड़ा रणनीतिक झटका दिया है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) ने अचानक अपने सबसे महत्वपूर्ण सैन्य कमांड का नाम बदल दिया है।

‘इंडो-पैसिफिक’ से वापस ‘पैसिफिक’ कमांड

अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने आधिकारिक घोषणा करते हुए ‘यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड’ (USINDOPACOM) का नाम बदलकर फिर से ‘यूएस पैसिफिक कमांड’ (USPACOM) कर दिया है। यह वही कमांड है जिसका मुख्यालय हवाई द्वीप पर स्थित है और जो हिंद महासागर से लेकर प्रशांत महासागर तक की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालता है।

पेंटागन का क्या है तर्क?

पेंटागन ने सोशल मीडिया पर इस बदलाव की जानकारी देते हुए कहा कि यह निर्णय कमांड की ऐतिहासिक जड़ों का सम्मान है। आधिकारिक बयान में कहा गया है कि 1947 में स्थापित यह कमांड 70 वर्षों तक USPACOM के नाम से ही जाना जाता था। पेंटागन का कहना है कि नाम बदलने से मिशन में कोई बदलाव नहीं आएगा और क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ सुरक्षा प्रतिबद्धता बनी रहेगी।

भारत के लिए क्यों है यह बड़ा झटका?

साल 2018 में ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान ही इस कमांड का नाम बदलकर ‘इंडो-पैसिफिक’ किया गया था। उस समय इसे भारत की बढ़ती रणनीतिक भूमिका और हिंद महासागर के महत्व को स्वीकार किए जाने के रूप में देखा गया था।

अब ‘इंडो’ शब्द को हटाना एक कूटनीतिक संकेत माना जा रहा है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका का ध्यान अब हिंद महासागर की सुरक्षा से हटकर वापस पूरी तरह से ‘प्रशांत महासागर’ (Pacific) पर केंद्रित हो गया है।

क्या बिगड़े हैं भारत-अमेरिका के संबंध?

माना जा रहा है कि यह कदम दोनों देशों के बीच हालिया समय में आई खटास की वजह से उठाया गया है। हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर, खाड़ी युद्ध के प्रभाव और ट्रेड डील को लेकर भारत और अमेरिका के बीच बातचीत में तनाव देखा गया है। ऐसे में इंडो शब्द को हटाना भारत के लिए एक कूटनीतिक संदेश की तरह देखा जा रहा है।

क्या QUAD पर पड़ेगा असर?

भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया का गठबंधन ‘QUAD’ पूरी तरह से ‘इंडो-पैसिफिक’ क्षेत्र की सुरक्षा पर टिका है। ऐसे में अमेरिकी रक्षा मंत्रालय का यह फैसला कई सवाल खड़े कर रहा है। क्या यह बदलता नाम क्वाड की भविष्य की रणनीति में दरार का संकेत है? यह देखना दिलचस्प होगा कि G7 समिट के दौरान पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की मुलाकात में इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाया जाता है।

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