महाराष्ट्र की सियासत एक बार फिर उबल रही है। उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) में टूट की अटकलों ने दिल्ली से मुंबई तक हलचल मचा दी है। यह पटकथा नई नहीं है—बंगाल की तर्ज पर महाराष्ट्र में भी वही असली-नकली का खेल दोहराया जा रहा है। क्या उद्धव की पार्टी का अस्तित्व खतरे में है?
बीते कुछ दिनों से दावा किया जा रहा है कि उद्धव ठाकरे के 9 में से 6 सांसद पाला बदलने की तैयारी में हैं। पुणे में एक सांसद के लिए प्राइवेट प्लेन तैयार होने की खबरें भी सामने आईं। हालांकि, फिलहाल यह उड़ान टल गई है। उद्धव ठाकरे ने अपने सांसदों की आपात बैठक बुलाई है और बगावत करने वालों को निष्कासन की चेतावनी दी है।
इस बीच, बीजेपी विधायक आशीषराव देशमुख ने एक चौंकाने वाला दावा किया है। उनका कहना है कि संजय राउत पर्दे के पीछे उद्धव ठाकरे और शरद पवार की पार्टियों का कांग्रेस में विलय कराने की कोशिश कर रहे हैं। इस योजना के तहत उद्धव को महाराष्ट्र कांग्रेस का अध्यक्ष बनाने की रणनीति की बात भी कही जा रही है। हालांकि, राउत ने इन खबरों को खारिज करते हुए कहा कि उनके सांसद मां भवानी की कसम खा चुके हैं।
2014 के बाद देश में क्षेत्रीय क्षत्रपों की ताकत सिमटती गई है। सपा, बसपा, आरजेडी, और शिवसेना जैसे मजबूत दलों का या तो विभाजन हुआ या वे NDA का हिस्सा बन गए। बीजेपी ने पहले छोटे भाई की भूमिका निभाने की रणनीति अपनाई और फिर ऑपरेशन लोटस के जरिए विपक्षी दलों को कमजोर किया। आज स्थिति यह है कि कई क्षेत्रीय दलों के लिए अपना वजूद बचाना ही एक बड़ी चुनौती बन गया है।
राजनीतिक समीकरणों को देखें तो कांग्रेस ही वह इकलौती पार्टी है जो बीजेपी के मुकाबले में कहीं न कहीं खड़ी दिख रही है। क्या क्षेत्रीय दलों के बिखराव के बाद देश की सियासत भविष्य में बीजेपी और कांग्रेस के बीच दो ध्रुवीय होने की ओर बढ़ रही है? यह सवाल महाराष्ट्र और बंगाल की घटनाओं के बाद और अधिक गहरा हो गया है।
महाराष्ट्र की तर्ज पर अब उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी सुगबुगाहट तेज है। यूपी सरकार में मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने दावा किया है कि टीएमसी और शिवसेना के बाद अब समाजवादी पार्टी में बड़ी टूट होने वाली है। राजभर का दावा है कि सपा के भीतर से ही बड़े नेता पार्टी छोड़ने की कवायद में जुटे हैं। अगर यह सच होता है, तो देश का सियासी नक्शा आने वाले समय में पूरी तरह बदल सकता है।
*#WATCH दिल्ली: शिवसेना UBT में फूट की अटकलों के बीच पार्टी सांसद संजय राउत ने कहा, अगर कोई जाना चाहता है, तो वो इस्तीफा देकर जा सकता है। अगर हमारे सांसदों के बारे में ऐसी खबरें आती हैं, तो उन्हें उनका खंडन करना चाहिए। इस बार महाराष्ट्र के लोग चुप नहीं रहेंगे। pic.twitter.com/O1q4fTpQSz
— ANI_HindiNews (@AHindinews) June 17, 2026
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