दिल्ली-NCR का कायाकल्प: 2041 तक बसेंगे 4 नमो सिटी , आबादी का दबाव कम करने के लिए बनी बड़ी रणनीति
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बढ़ती आबादी और शहरी बोझ को देखते हुए केंद्र सरकार ने दिल्ली-एनसीआर (NCR) के भविष्य के लिए एक महत्वाकांक्षी खाका तैयार किया है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड की 42वीं बैठक में मास्टर प्लान-2041 पर मुहर लगाते हुए कई बड़े निर्णय लिए गए हैं, जो भविष्य के शहरों की तस्वीर बदल देंगे।

चार नए ग्रीनफील्ड शहरों का उदय दिल्ली पर लगातार बढ़ रहे जनसंख्या के दबाव को संतुलित करने के लिए एनसीआर में चार नए ग्रीनफील्ड शहर बसाए जाएंगे। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने बताया कि इन शहरों को नमो सिटी या नमो नोड्स के रूप में विकसित किया जाएगा। इन शहरों को आधुनिक परिवहन, विश्वस्तरीय स्वास्थ्य, शिक्षा और व्यावसायिक केंद्रों से लैस किया जाएगा। इसके लिए शुरुआती चरण में 5,000 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है।

नौ काउंटर मैग्नेट क्षेत्रों से पलायन पर लगाम सरकार की योजना केवल नए शहर बसाने तक सीमित नहीं है। लोग रोजगार और बेहतर सुविधाओं की तलाश में दिल्ली की ओर न भागें, इसके लिए 6 राज्यों में 9 काउंटर मैग्नेट क्षेत्रों (CMA) की पहचान की गई है। इनमें हिसार, अंबाला, कोटा, जयपुर, पटियाला-राजपुरा, कानपुर-लखनऊ, बरेली, ग्वालियर और देहरादून शामिल हैं। इन शहरों में बुनियादी ढांचा विकसित कर इन्हें विकास का नया केंद्र बनाया जाएगा।

प्रदूषण के लिए बन रहा 3-जोन का फॉर्मूला बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए एनसीआर को अब तीन अलग-अलग जोन में बांटने का प्रस्ताव है। दिल्ली और उसके बिल्कुल करीब के इलाकों में प्रदूषण के सख्त नियम लागू रहेंगे, जबकि राजधानी से दूर स्थित जिलों को कुछ नियमों में रियायत दी जा सकती है। बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि वायु प्रदूषण एक साझा चुनौती है, जिसके लिए सभी राज्यों को एक समान नीति अपनानी होगी।

NCR की सीमा में नहीं होगा कोई बदलाव हरियाणा सरकार द्वारा करनाल, जींद, पानीपत, भिवानी और महेंद्रगढ़ को एनसीआर से बाहर करने की मांग को बोर्ड ने खारिज कर दिया है। सरकार का स्पष्ट मानना है कि क्षेत्रीय संतुलन और सुनियोजित विकास के लिए एनसीआर का मौजूदा स्वरूप ही प्रभावी है। अतः एनसीआर की वर्तमान सीमाओं को यथावत रखा गया है।

भविष्य की चुनौती: 15 करोड़ तक पहुंच सकती है आबादी आंकड़ों पर गौर करें तो वर्तमान में एनसीआर की आबादी करीब 7.5 करोड़ है, जो अगले 15 वर्षों में दोगुना यानी 15 करोड़ तक पहुंच सकती है। उम्मीद है कि वर्ष 2041 तक एनसीआर की करीब 67 प्रतिशत आबादी शहरी होगी। इस विकराल शहरीकरण को देखते हुए ही सरकार का यह मास्टर प्लान भविष्य की सुरक्षा के तौर पर देखा जा रहा है।

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