कवच: अब लोको पायलट की चूक पर भी नहीं होगा रेल हादसा, रेलवे ने बिछाया सुरक्षा का अभेद्य जाल
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भारतीय रेलवे ने रेल यात्रा को और अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। अहमदाबाद डिविजन में 140 करोड़ रुपये की लागत से कवच (Kavach) सिस्टम के विस्तार को मंजूरी दी गई है। यह आधुनिक तकनीक यात्रियों की सुरक्षा के लिए एक मजबूत ढाल साबित होगी।

पूरे डिविजन में होगा सुरक्षा का घेरा इस परियोजना के तहत 598 किलोमीटर लंबे रेल मार्ग पर स्वदेशी कवच 4.0 वर्जन को इंस्टॉल किया जाएगा। इससे पहले इस क्षेत्र के 702 किलोमीटर रूट पर भी इस सिस्टम को लगाने की मंजूरी मिल चुकी थी। अब नए विस्तार के बाद पूरा अहमदाबाद डिविजन इस अत्याधुनिक सुरक्षा प्रणाली से पूरी तरह कवर हो जाएगा।

कैसे काम करता है कवच ? कवच एक स्वदेशी ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन (ATP) सिस्टम है। यह ट्रेन और सिग्नलिंग सिस्टम के बीच लगातार तालमेल बिठाकर काम करता है। इसका मुख्य उद्देश्य मानवीय गलतियों को शून्य करना है, विशेषकर उन स्थितियों में जहां लोको पायलट से सिग्नल समझने में चूक हो सकती है।

ब्रेक लगाने की जिम्मेदारी अब सिस्टम की अगर किसी कारणवश लोको पायलट लाल सिग्नल को नजरअंदाज करता है या समय पर ब्रेक नहीं लगा पाता, तो कवच सक्रिय हो जाता है। यह सिस्टम खुद ही ट्रेन में ब्रेक लगाकर उसकी गति को नियंत्रित कर देता है। इससे सिग्नल पासिंग एट डेंजर (SPAD) जैसी घटनाओं और ट्रेनों की आमने-सामने की टक्कर को रोकने में मदद मिलती है।

कोहरे में भी मिलेगी सुरक्षा इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत खराब मौसम है। कोहरे या कम दृश्यता (Visibility) वाली परिस्थितियों में, जहां इंसानी आंखों से सिग्नल देखना मुश्किल होता है, कवच सिस्टम ट्रेन की गति और सुरक्षित दूरी को बनाए रखता है। इससे न केवल हादसों का खतरा कम होता है, बल्कि रेल संचालन में भी निरंतरता बनी रहती है।

रेलवे का यह कदम स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देने और यात्रियों को विश्वस्तरीय सुरक्षा कवच प्रदान करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इससे आने वाले समय में भारतीय रेल और भी भरोसेमंद और सुरक्षित हो जाएगी।

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