वेदांता चेयरमैन अनिल अग्रवाल के लिए हालिया दिन बेहद खास और भावनात्मक रहा। कंपनी की चार नई इकाइयों की लिस्टिंग ने उन्हें 24 साल पहले की यादों में ले जाकर खड़ा कर दिया है।
अग्रवाल ने सोशल मीडिया पर अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि, 24 साल पहले जो बीज बोया था, वह आज एक मजबूत पेड़ बन चुका है। 2000 के दशक की शुरुआत में लंदन में वेदांता रिसोर्सेज की लिस्टिंग के साथ शुरू हुआ सफर आज नई ऊंचाइयों पर है।
स्वतंत्र उड़ान के लिए तैयार हैं कंपनियां अनिल अग्रवाल का मानना है कि वेदांता की अब हर नई इकाई अपने दम पर आगे बढ़ने और अपनी अलग पहचान बनाने के लिए पूरी तरह तैयार है। उनका दावा है कि इन नई कंपनियों में से प्रत्येक में 100 अरब डॉलर मूल्य की कंपनी बनने की पूरी क्षमता मौजूद है।
वेदांता का यह विस्तार ऐसे क्षेत्रों में है जो भारत की दीर्घकालिक जरूरतों से सीधे जुड़े हैं। अग्रवाल के अनुसार, भारत के दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह में ये उत्पाद और सेवाएं अहम भूमिका निभाएंगे।
मांग और आपूर्ति का बड़ा गैप वेदांता जिन उत्पादों का निर्माण कर रही है, उनकी मांग दो अंकों की दर से बढ़ रही है। अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि बाजार में मांग और आपूर्ति के बीच एक बड़ा अंतर है, जिसे घरेलू उत्पादकों को ही पूरा करना होगा। वेदांता लिमिटेड और हिंदुस्तान जिंक इस अवसर को भुनाने के लिए सबसे बेहतर स्थिति में हैं।
निवेशकों का जताया आभार अपनी सफलता का श्रेय शेयरधारकों, सरकार और लाखों कर्मचारियों को देते हुए अग्रवाल ने उनका शुक्रिया अदा किया। उन्होंने कहा कि छोटे से छोटे निवेशक का भरोसा ही समूह की असली ताकत है।
आंकड़ों की बात करें तो वेदांता ने पिछले पांच वर्षों में अपने निवेशकों को 300% का कुल रिटर्न दिया है, साथ ही 60% डिविडेंड यील्ड दी है। अग्रवाल ने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में समूह की कंपनियां इससे भी बेहतर प्रदर्शन करेंगी और निवेशकों की संपत्ति में इजाफा करेंगी।
Yesterday was truly a historic and deeply emotional day for me.
— Anil Agarwal (@AnilAgarwal_Ved) June 16, 2026
The listing of four new Vedantas took me back 24 years when Vedanta Resources was listed in London. We sowed the seeds then and now each of our amazing trees is ready to stand on its own strength. This is just the… pic.twitter.com/mo0HJ604ZL
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