उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की बिसात बिछने लगी है, लेकिन इसी बीच अयोध्या से आई एक तस्वीर ने सियासी पारा चढ़ा दिया है। विकास के नाम पर 1940 में बने एक प्राचीन शिव मंदिर को जमींदोज कर दिया गया है। इस कार्रवाई पर पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सख्त रुख अपनाते हुए सरकार से जवाब मांगा है।
11 जून 2026 को अयोध्या के ककराही बाजार में प्रशासन का बुलडोजर चला। 14 कोसी परिक्रमा मार्ग को चौड़ा करने के नाम पर प्रशासन ने 86 साल पुराने गुलाबी शिव मंदिर समेत कई मकानों को गिरा दिया। इस कार्रवाई के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद बहस छिड़ गई है कि क्या विकास की कीमत पर सांस्कृतिक विरासत को मिटाना उचित है?
प्रशासन का कहना है कि मंदिर और आसपास के अन्य निर्माण परिक्रमा पथ के दायरे में आ रहे थे। एडीएम अमित कुमार भट्ट और एसडीएम अरविंद कुमार की मौजूदगी में की गई इस कार्रवाई के बारे में प्रशासन का दावा है कि प्रभावितों को पहले ही उचित मुआवजा दिया जा चुका था और कई बार नोटिस देने के बाद ही ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया अपनाई गई।
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने इस घटना को एक बड़े घोटाले का हिस्सा बताया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करते हुए मांग की है कि बीजेपी सरकार के सभी कॉरिडोर और सड़क चौड़ीकरण परियोजनाओं की बहुसदस्यीय न्यायिक जांच होनी चाहिए।
अखिलेश ने साफ कहा, इस पूरे घपले में शामिल किसी भी ट्रस्टी, कमेटी सदस्य, प्रशासनिक या विकास प्राधिकरण के अधिकारी को बख्शा न जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि इन परियोजनाओं के पीछे अवैध कमाई और काली संपत्ति का खेल चल रहा है।
अयोध्या, जो बीजेपी के राम-विकास मॉडल का केंद्र है, अब विपक्ष के सीधे निशाने पर है। सपा नेता अरुण निषाद ने मौके पर पहुंचकर विरोध दर्ज कराया है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुद्दा 2027 के चुनावों में विकास बनाम विरासत की बड़ी बहस को जन्म दे सकता है, जो यूपी के धार्मिक और सामाजिक समीकरणों को प्रभावित करने की क्षमता रखता है।
1940 का यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र था, बल्कि एक ऐतिहासिक धरोहर भी था। जानकारों का कहना है कि ऐसी विकास परियोजनाओं को लागू करते समय हेरिटेज इम्पैक्ट असेसमेंट (विरासत पर प्रभाव का आकलन) बेहद जरूरी है ताकि आधुनिकता के नाम पर हम अपनी संस्कृति की जड़ों को न खो दें। फिलहाल, इस घटना ने अयोध्या के विकास मॉडल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
*भाजपा सरकार के बनाए हर ‘कॉरिडोर’ और ‘चौड़ीकरण’ की योजना के पीछे जो घपला-घोटाला है, उसके लिए एक बहुसदस्यी न्यायिक जाँच हो। इसमें संलिप्त न कोई ट्रस्टी बख़्शा जाए, न किसी कमेटी का कोई सदस्य और न ही कोई प्रशासनिक और विकास प्राधिकरण का अधिकारी। इतने बड़े घोटाले इन सबकी मिलीभगत से ही… pic.twitter.com/3cGoWcAO0j
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) June 16, 2026
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