अब मेडिकल स्टोर से सिरप खरीदना इतना आसान नहीं, सरकार ने बदले दवा बिक्री के कड़े नियम
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अगर आप सामान्य खांसी या बुखार होने पर मेडिकल स्टोर से सीधे सिरप खरीद लेते थे, तो अब ऐसा करना मुश्किल होगा। केंद्र सरकार ने दवाओं की बिक्री को लेकर नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब कोई भी सिरप (कफ सिरप सहित) बिना डॉक्टर की वैध पर्ची (प्रिस्क्रिप्शन) के नहीं बेचा जा सकेगा।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने ड्रग्स रूल्स, 1945 में संशोधन करते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि मरीजों की सुरक्षा और दवाओं के बढ़ते दुरुपयोग को रोकने के लिए यह सख्त कदम उठाना जरूरी था।

क्यों पड़ी नियमों को बदलने की जरूरत?

पिछले कुछ वर्षों में सिरप के गलत इस्तेमाल और नशे के रूप में इनके सेवन के मामले तेजी से बढ़े हैं। कई सिरप में ऐसे रसायन होते हैं जिनका अधिक मात्रा में सेवन करने पर नशा होता है, जो युवाओं के लिए बड़ी चिंता का विषय है। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय कफ सिरप की गुणवत्ता पर उठे सवालों ने सरकार को मजबूर किया है।

क्या हैं सरकार के फैसले के 5 बड़े फायदे?

  1. दवाओं के गलत इस्तेमाल और ओवरडोज पर पूरी तरह रोक लगेगी।
  2. नशीले पदार्थों के रूप में सिरप के दुरुपयोग में कमी आएगी।
  3. मरीजों को डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही सही दवा मिल पाएगी।
  4. दवा बिक्री पर रेगुलेटर की बेहतर निगरानी संभव हो सकेगी।
  5. दवा कंपनियों और मेडिकल स्टोर संचालकों की जवाबदेही बढ़ेगी।

आम लोगों और ग्रामीण इलाकों पर क्या असर?

इस बदलाव का सबसे बड़ा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो बिना डॉक्टर की सलाह के खुद ही दवा का चुनाव कर लेते हैं। अब छोटी-मोटी बीमारी में भी डॉक्टर के पास जाना पड़ेगा, जिससे समय और पैसे दोनों खर्च होंगे।

ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है। जहां डॉक्टरों की उपलब्धता कम है, वहां लोगों को नुस्खा बनवाने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ सकती है। विशेषज्ञों का यह भी डर है कि इस स्थिति में ग्रामीण इलाकों में झोलाछाप डॉक्टरों पर निर्भरता बढ़ सकती है।

जहरीली दवाओं का अंतरराष्ट्रीय दबाव

यह फैसला अचानक नहीं लिया गया है। हाल ही में गाम्बिया, उज्बेकिस्तान और कैमरून जैसे देशों में भारतीय कफ सिरप पीने से बच्चों की मौत के मामले सामने आए थे, जिसके बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने अलर्ट जारी किया था। इन घटनाओं के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की साख बचाने और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने यह सख्त रुख अपनाया है।

अब मेडिकल स्टोर्स को नियमों का सख्ती से पालन करना होगा, ताकि दवा का दुरुपयोग रुके और मरीज सही इलाज तक पहुँच सकें।

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