अब बिना डॉक्टर की पर्ची के नहीं मिलेगी खांसी की दवा, सरकार ने कड़े किए नियम
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केंद्र सरकार ने दवाओं की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है। अब देश में कोई भी खांसी का सिरप या औषधीय सिरप बिना डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन (पर्ची) के नहीं मिलेगा। स्वास्थ्य मंत्रालय ने ड्रग्स रूल्स, 1945 में संशोधन करते हुए सिरप को छूट वाली श्रेणी से बाहर कर दिया है।

क्यों लिया गया यह सख्त फैसला?

यह निर्णय मुख्य रूप से बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। पिछले कुछ समय में दूषित कफ सिरप के सेवन से बच्चों की मौत के कई मामले सामने आए थे। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में 22 से अधिक बच्चों की मौत और वैश्विक स्तर पर 140 से अधिक बच्चों की जान जाने के बाद सरकार ने यह कदम उठाया है।

WHO की चेतावनी के बाद जागी सरकार

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने पहले ही भारतीय कफ सिरप में डायएथिलीन ग्लाइकोल (DEG) जैसे जहरीले रसायनों की मौजूदगी को लेकर चेतावनी दी थी। गांबिया, उज्बेकिस्तान और कैमरून जैसे देशों में भारतीय सिरप के कारण बच्चों की मौतों ने वैश्विक स्तर पर भारत की दवा प्रणाली पर सवाल खड़े किए थे।

नए नियमों की 10 बड़ी बातें

  1. अनिवार्य प्रिस्क्रिप्शन: अब मेडिकल स्टोर से सिरप खरीदने के लिए डॉक्टर की पर्ची दिखाना अनिवार्य है।
  2. छूट श्रेणी से बाहर: सरकार ने ड्रग्स रूल्स, 1945 के शेड्यूल K में संशोधन कर सिरप को रियायत वाली सूची से हटा दिया है।
  3. दुरुपयोग पर रोक: बिना मेडिकल सलाह के दवा खरीदने की प्रवृत्ति पर पूर्ण विराम लगेगा।
  4. ओवरडोज का खतरा कम: डॉक्टर की देखरेख में दवा मिलने से गलत डोज के जोखिम कम होंगे।
  5. फार्मासिस्ट की जवाबदेही: अब केमिस्ट को दवा देने से पहले पर्ची की अनिवार्य रूप से जांच करनी होगी।
  6. सेल्फ-मेडिकेशन पर लगाम: खांसी-जुकाम में लोग खुद से दवा खरीदकर सेवन करते थे, अब ऐसा नहीं हो सकेगा।
  7. सुरक्षा का दायरा: यह नियम दवाओं के दुरुपयोग को रोकने और मरीजों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए लागू किया गया है।
  8. रिकॉर्ड रखना जरूरी: बिक्री का सटीक रिकॉर्ड रखना अनिवार्य होगा ताकि नियमों का उल्लंघन न हो।
  9. विवेकपूर्ण उपयोग: मंत्रालय ने बच्चों में कफ सिरप के रैशनल यूज (विवेकपूर्ण इस्तेमाल) पर जोर दिया है।
  10. सख्त कार्रवाई: नियमों का पालन न करने वाले मेडिकल स्टोरों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

विशेषज्ञों और मंत्रालय की राय

बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रियंका अग्रवाल का कहना है कि बच्चों को बिना सलाह दवा देने से सांस की समस्या और एलर्जी जैसी गंभीर दिक्कतें हो सकती हैं। वहीं, स्वास्थ्य मंत्रालय का साफ कहना है कि अधिकांश खांसी सेल्फ-लिमिटिंग होती है, जिसके लिए हर बार सिरप की जरूरत नहीं होती।

यह बदलाव भारत में दवाओं की गुणवत्ता और वितरण प्रणाली को और अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। अब ग्राहकों को किसी भी औषधीय सिरप के लिए डॉक्टर के पास जाना ही होगा।

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