अयोध्या राम मंदिर चंदा चोरी विवाद: सियासत गरमाई, साधु-संतों ने की निष्पक्ष जांच की मांग
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अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के आरोपों ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद यह मामला तूल पकड़ चुका है। आरोपों की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने मामले की जांच के लिए एसआईटी (SIT) का गठन कर दिया है।

एसआईटी की सक्रियता और जांच

मामले की जांच के लिए लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, आईजी किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन की तीन सदस्यीय एसआईटी टीम बनाई गई है। टीम ने जांच शुरू कर दी है और अब तक 40 से अधिक लोगों से पूछताछ की गई है। एसआईटी मंगलवार को भी मंदिर परिसर पहुंचकर साक्ष्य जुटाने और गवाहों के बयान दर्ज करने का काम जारी रखेगी।

साधु-संतों की तीखी प्रतिक्रिया

राम मंदिर के पवित्र परिसर में चोरी की खबरों पर देश के प्रमुख संतों ने चिंता जताई है। परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि यह आस्था का विषय है और इस पर चर्चा तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा तुरंत एसआईटी बैठाने के फैसले का स्वागत किया है।

वहीं, द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि मंदिरों का प्रबंधन धर्म और शास्त्रों के ज्ञाताओं के हाथ में होना चाहिए। उन्होंने दान की राशि का उपयोग केवल धार्मिक और सामाजिक कार्यों में करने की वकालत की।

साइकिल की औकात से बड़ी बिल्डिंग तक : महंत कमल नयन दास

राम मंदिर ट्रस्ट के महंत कमल नयन दास ने इस विवाद पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा, जिसकी साइकिल की औकात नहीं थी, आज उनकी बड़ी-बड़ी बिल्डिंग हैं। उन्होंने बिना नाम लिए इशारा किया कि जो भी दोषी हैं, उन्हें सख्त दंड मिलना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री की ईमानदारी पर भरोसा जताते हुए न्यायिक जांच की मांग की।

आरोपों का सिलसिला

अखिलेश यादव ने मंदिर के चढ़ावे में करोड़ों की हेराफेरी का दावा किया था, जिसे श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने सिरे से खारिज किया है। राय का कहना है कि मंदिर का सारा लेन-देन पूरी तरह पारदर्शी है।

इस पूरे घटनाक्रम पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने भी कटाक्ष करते हुए इसे पुराना भ्रष्टाचार बताया है। फिलहाल, सभी की नजरें एसआईटी की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि मंदिर की सुरक्षा और प्रबंधन में चूक कहां हुई।

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