जहाज डूब रहा हो तो उसे छोड़ना गद्दारी है : बाबुल सुप्रियो ने टीएमसी छोड़ने की अटकलों पर लगाया पूर्ण विराम
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तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रही सियासी हलचल और नेताओं के इस्तीफों के बीच राज्यसभा सांसद बाबुल सुप्रियो ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। पार्टी के कई दिग्गज नेताओं के साथ छोड़ने के बाद उठ रहे सवालों पर सुप्रियो ने एक वीडियो संदेश जारी कर सभी अटकलों को खारिज किया है।

मुश्किल वक्त में जहाज नहीं छोड़ा जाता साफ शब्दों में अपनी बात रखते हुए बाबुल सुप्रियो ने कहा, जब जहाज मुश्किल हालात में हो, तो उसे छोड़ना ठीक नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे न तो किसी गुट में शामिल हो रहे हैं और न ही किसी दूसरी पार्टी में जाने का कोई इरादा रखते हैं। सुप्रियो ने जोर देकर कहा कि वे अपनी पार्टी और नेतृत्व के साथ मजबूती से खड़े हैं।

मीडिया के सवालों से परेशान सुप्रियो इससे पहले सुप्रियो ने सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जाहिर की थी। उन्होंने कहा कि वे मीडिया के उन लगातार फोन कॉल्स से थक चुके हैं, जिनमें बार-बार उनकी निष्ठा पर सवाल उठाए जा रहे हैं। उनका कहना है कि वे वहीं हैं जहां पहले थे—अपनी पार्टी और अपने नेता के साथ।

विपक्ष के साथ काम करने पर रुख सुप्रियो ने बंगाल की राजनीति में एक परिपक्व रुख अपनाते हुए कहा कि वे जनता के जनादेश का सम्मान करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे राज्य सरकार के साथ मिलकर अपने MPLAD फंड का इस्तेमाल जनहित में करेंगे। उन्होंने कहा, राजनीतिक विचारधारा अलग हो सकती है, लेकिन आसनसोल के विकास और जनता के कार्यों के लिए मुझे विपक्षी नेताओं के साथ समन्वय करने में कोई गुरेज नहीं है।

अतीत से लिया सबक अपने पुराने अनुभवों का जिक्र करते हुए सुप्रियो ने बताया कि अतीत में झालमुड़ी एपिसोड के दौरान उन्हें अपनी ही पार्टी के लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा था। बावजूद इसके, उन्होंने आसनसोल में ईस्ट-वेस्ट मेट्रो प्रोजेक्ट जैसी अटकी परियोजनाओं को 90% तक पूरा किया। उन्होंने दोहराया कि उनका एकमात्र लक्ष्य जनता के पैसे का सही इस्तेमाल और बंगाल का विकास है।

टीएमसी में बढ़ती बेचैनी सांसद का यह बयान ऐसे समय में आया है जब शत्रुघ्न सिन्हा, सॉयनी घोष और युसूफ पठान जैसे बड़े नामों के पार्टी छोड़ने की खबरों से ममता बनर्जी की पार्टी संकट में घिरी दिख रही है। पार्टी के अंदरूनी कलह और कल्याण बनर्जी जैसे नेताओं के तीखे बयानों ने टीएमसी के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ऐसे में बाबुल सुप्रियो का यह स्टैंड ममता बनर्जी के लिए थोड़ी राहत लेकर आया है।

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