हिंदू ग्रोथ रेट का नाम कांग्रेस ग्रोथ रेट होना चाहिए था: NDA बैठक में गरजे पीएम मोदी
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एनडीए की एक महत्वपूर्ण बैठक को संबोधित करते हुए कांग्रेस पर तीखा प्रहार किया है। सबसे लंबे समय तक चुने हुए प्रधानमंत्री रहने का गौरव हासिल करने वाले पीएम मोदी ने कहा कि देश को जिस धीमी विकास दर का कलंक झेलना पड़ा, उसे चतुराई से हिंदू ग्रोथ रेट का नाम दिया गया था, जबकि असल में वह कांग्रेस ग्रोथ रेट थी।

सेवा को हमेशा एक साधना माना पीएम मोदी ने इस अवसर पर जनता का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इतने लंबे समय तक मां भारती की सेवा का सौभाग्य मिलना ईश्वर की कृपा है। उन्होंने कहा, मेरे लिए जनता जनार्दन ही ईश्वर का रूप है। 2014 से पहले के दशकों में देश ने अस्थिरता और उथल-पुथल देखी थी, जिससे देश को भारी नुकसान उठाना पड़ा।

2014 का बदलाव: आशा से आत्मविश्वास तक प्रधानमंत्री ने कहा कि 2014 में जो उम्मीद जगी थी, वह आज एक नए आत्मविश्वास में बदल गई है। उन्होंने एनडीए सरकार के 12 वर्षों का जिक्र करते हुए कहा कि हमारी सही नीतियों और दिशा के कारण ही 25 करोड़ से ज्यादा लोग गरीबी रेखा से बाहर निकले हैं। यह आंकड़े इस बात का सबूत हैं कि जब नीयत साफ हो, तो विकास की रफ्तार तेज होती है।

कांग्रेस पर तीखा हमला विपक्ष पर हमला बोलते हुए पीएम ने कहा कि कांग्रेस ने देश को लाचारी और हीन भावना के गर्त में धकेल रखा था। उन्होंने कहा, कांग्रेस की कार्यशैली और विफलता को हिंदू ग्रोथ रेट का नाम दिया गया, ताकि कलंक देश की आबादी पर मढ़ा जा सके। वास्तव में वह कांग्रेस ग्रोथ रेट थी, जिसमें न शासन था, न नीति और न ही कोई स्पष्ट निर्णय।

विकास की नई रफ्तार पीएम मोदी ने याद दिलाया कि अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में एनडीए सरकार ने विकास की पहली झलक दिखाई थी, लेकिन 2004 में देश फिर घोटालों के दौर में फंस गया। उन्होंने जोर देकर कहा कि 2014 के बाद देश ने देखा है कि जब नीयत, नीति और निर्णय एक साथ मिलते हैं, तो दशकों के काम महीनों में पूरे होने लगते हैं।

भविष्य का संकल्प प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि अब हमें नव-मध्यम वर्ग को पीछे नहीं होने देना है। उन्होंने कहा कि देश के युवा, नारी शक्ति और मध्यम वर्ग की आकांक्षाओं को पूरा करना हमारी प्राथमिकता है। सरकार का लक्ष्य 140 करोड़ भारतीयों के सपनों को हकीकत में बदलना है, ताकि विकसित भारत का संकल्प पूरा हो सके।


क्या है हिंदू ग्रोथ रेट ? 1950 से 1980 के बीच भारत की औसत विकास दर महज 3.5 से 4 प्रतिशत के आसपास रही थी। उस दौरान दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के प्रोफेसर राजकृष्ण ने इस धीमी विकास दर को व्यंग्यात्मक रूप से हिंदू ग्रोथ रेट का नाम दिया था। अर्थशास्त्रियों का तर्क था कि यह धीमी गति भारत की सांस्कृतिक सोच के कारण है, जिस पर आज पीएम मोदी ने पलटवार करते हुए इसे कांग्रेस की विफलता करार दिया है।

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