राज्यसभा चुनाव: परिमल नाथवानी का नामांकन मंजूर, कांग्रेस-विपक्ष को बड़ा झटका
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झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए चल रहे सियासी घमासान में बड़ा मोड़ आया है। बुधवार को रिटर्निंग ऑफिसर (RO) ने परिमल नाथवानी के नामांकन को पूरी तरह वैध करार देते हुए उसे मंजूरी दे दी है। इस फैसले के साथ ही नाथवानी के राज्यसभा उम्मीदवार बनने का रास्ता साफ हो गया है। एक दिन पहले कागजों में कथित गड़बड़ियों के चलते उनके नामांकन को होल्ड पर रखा गया था।

सुनवाई बनी कानूनी जंग का अखाड़ा बुधवार सुबह से ही झारखंड विधानसभा में इस मामले पर लंबी सुनवाई चली। कांग्रेस और झामुमो के उम्मीदवार के सामने सीनियर वकीलों की फौज तैनात थी। कांग्रेस की ओर से पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद ने मोर्चा संभाला, तो वहीं नाथवानी की तरफ से सुप्रीम कोर्ट के दिग्गज वकीलों ने दलीलें पेश कीं। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि उन्हें अपनी बात रखने का पर्याप्त समय नहीं मिला और कार्यवाही को जल्दबाजी में निपटाने का दबाव बनाया गया।

विधानसभा के अंदर दलीलें, बाहर हंगामा जहां अंदर कानूनी दांव-पेंच चल रहे थे, वहीं बाहर का नजारा रणभूमि जैसा था। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विधानसभा परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। नौबत यहां तक आ गई कि सुरक्षाकर्मियों के साथ प्रदर्शनकारियों की धक्का-मुक्की हुई। इस विरोध में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश समेत तमाम बड़े मंत्री शामिल रहे। वहीं, दूसरी ओर बीजेपी कार्यकर्ताओं ने भी मोर्चा संभाला और नारेबाजी कर नाथवानी के पक्ष में माहौल बनाया।

कांग्रेस के आरोप और भाजपा का पलटवार कांग्रेस का कहना था कि नाथवानी ने अपने हलफनामे में नाम के अंतर, खाली कॉलम और आपराधिक मामलों की जानकारी छिपाने जैसी गंभीर चूक की हैं। कांग्रेस नेता नासिर अहमद ने इसे चुनाव आयोग के नियमों का उल्लंघन बताया। जवाब में बीजेपी के बाबूलाल मरांडी ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि हार के डर से कांग्रेस अब बहाने ढूंढ रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 18 जून को कांग्रेस की हार निश्चित है और वे पहले से ही अपनी हार का ठीकरा फोड़ने के लिए ये मुद्दे बना रहे हैं।

चुनावी गणित और भविष्य की चुनौतियां झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए 18 जून को मतदान होना है। विधानसभा में इंडिया ब्लॉक के पास 56 विधायक हैं, जबकि एनडीए के पास 24 का आंकड़ा है। जीत के लिए हर उम्मीदवार को 28 प्रथम वरीयता (फर्स्ट-प्रेफरेंस) वोटों की जरूरत है। नाथवानी की एंट्री ने चुनाव को बेहद दिलचस्प बना दिया है। फिलहाल, नामांकन मंजूर होने से विपक्ष के लिए अब अपनी रणनीति को दोबारा तैयार करने की चुनौती बढ़ गई है।

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