आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की चमक-धमक के बीच अमेरिका के स्थानीय समुदायों में एक गहरी नाराजगी पनप रही है। एआई को शक्ति देने वाले विशाल डेटा सेंटर्स अब विवादों के घेरे में हैं। लोग सड़कों पर उतर आए हैं और इसके पीछे के असली कारण जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे।
क्या हैं डेटा सेंटर्स और क्यों हो रहा विरोध? डेटा सेंटर वे विशाल तकनीकी ढाँचे हैं जहाँ AI मॉडल्स, क्लाउड सेवाएं और इंटरनेट का भारी-भरकम डेटा स्टोर और प्रोसेस किया जाता है। AI की वैश्विक दौड़ में अमेरिका में इनकी संख्या तेजी से बढ़ रही है। लेकिन स्थानीय निवासियों का कहना है कि ये सेंटर उनके जीवन की शांति छीन रहे हैं। बढ़ते बिजली बिल, पानी की भारी खपत और कूलिंग सिस्टम से होने वाला शोर लोगों के लिए असहनीय होता जा रहा है।
टेक कंपनियों का बड़ा आरोप: विदेशी साजिश इस विरोध को लेकर टेक इंडस्ट्री संगठन नेटचॉइस के सीईओ स्टीव डेलबिएनको ने एक बड़ा दावा किया है। उनका मानना है कि विदेशी ताकतें, विशेष रूप से चीन और उससे जुड़े नेटवर्क, सोशल मीडिया के जरिए इस विरोध को हवा दे रहे हैं। जांच में पता चला है कि विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी कई सोशल मीडिया प्रोफाइल खुद को अमेरिकी बताती हैं, लेकिन असल में वे बांग्लादेश, पोलैंड और अफ्रीका जैसे देशों से संचालित हो रही हैं।
जनता की नाराजगी या केवल दिखावा? टेक कंपनियों के इन दावों को पर्यावरण संगठन और स्थानीय कार्यकर्ता नकार रहे हैं। उनका तर्क है कि कंपनियां अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए विदेशी साजिश का कार्ड खेल रही हैं। हाल ही में हुए एक गैलप पोल के आंकड़े भी चौंकाने वाले हैं—इसके अनुसार, 71% अमेरिकी नागरिक नहीं चाहते कि उनके इलाकों में नए डेटा सेंटर्स बनाए जाएं। इससे साफ होता है कि यह गुस्सा केवल भड़काया हुआ नहीं, बल्कि वास्तविक है।
संसाधनों का संकट और राजनीतिक मोड़ डेटा सेंटर्स को लगातार ठंडा रखने के लिए लाखों गैलन पानी और भारी बिजली की खपत होती है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इससे उनके क्षेत्र के संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा है और बिजली बिलों में अचानक उछाल देखा जा रहा है। इसके साथ ही, मशीनों के शोर ने आसपास के रिहायशी इलाकों में रहना दूभर कर दिया है।
अब यह मामला पूरी तरह राजनीतिक रंग ले चुका है। एक तरफ एआई समर्थक समूह संसद से विदेशी हस्तक्षेप की जांच की मांग कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ पर्यावरण संगठन कंपनियों को जवाबदेह ठहराने के लिए दबाव बना रहे हैं। यह विवाद अब अमेरिका की भविष्य की एआई नीति और तकनीकी विकास की दिशा को बदलने की क्षमता रखता है।
📸 An AI data center protest in Salt Lake City. pic.twitter.com/3bDl1EcKx9
— Dangerous Minds (@DangerMindsBlog) June 3, 2026
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