डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए अब क्यूबा की ओर भी इशारा कर दिया है। ट्रंप ने तंज कसा है कि ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स को गटर में पहुंचाने के बाद, अमेरिकी सेना वापसी में क्यूबा में थोड़ा आराम करेगी। यह बयान केवल एक धमकी नहीं है, बल्कि इसके पीछे 60 साल पुराना 75,000 करोड़ रुपये (लगभग 9 अरब डॉलर) का गहरा विवाद है।
इस विवाद की जड़ 1959 में क्यूबा में हुई क्रांति है। फिदेल कास्त्रो के सत्ता में आते ही क्यूबा ने निजी संपत्तियों, चीनी मिलों, बैंकों और तेल कंपनियों को अपने नियंत्रण में ले लिया। इनमें से बड़ी संख्या में संपत्तियां अमेरिकी नागरिकों और कंपनियों की थीं। करीब 6,000 अमेरिकी संपत्तियों को जब्त किया गया, जिसकी तत्कालीन कीमत 1.9 अरब डॉलर थी, जो अब ब्याज के साथ बढ़कर 75,000 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है।
अमेरिका और क्यूबा के रिश्तों में कड़वाहट 1996 में और बढ़ गई, जब क्यूबा ने अमेरिकी सीमा में दो नागरिक विमानों को मार गिराया। इसके जवाब में अमेरिका ने हेम्स-बर्टन एक्ट लागू किया। इस कानून ने अमेरिकी नागरिकों को उन विदेशी कंपनियों पर केस करने का अधिकार दिया जो क्यूबा में उनकी पुरानी संपत्तियों का उपयोग कर रही हैं। साथ ही, यह स्पष्ट कर दिया कि मुआवजा मिलने तक क्यूबा पर प्रतिबंध जारी रहेंगे।
वर्तमान में क्यूबा की आर्थिक स्थिति बेहद दयनीय है। हाल ही में देश को लंबी अवधि तक बिजली कटौती और ब्लैक आउट का सामना करना पड़ा क्योंकि अमेरिका ने वहां तेल की आपूर्ति रोक दी थी। ऐसी चरमराई अर्थव्यवस्था के लिए 75,000 करोड़ रुपये का भुगतान करना लगभग असंभव है। क्यूबा का तर्क है कि उस समय राष्ट्रीयकरण देश की आवश्यकता थी, लेकिन अब यह मामला कूटनीतिक और कानूनी हथियारों में बदल चुका है।
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस मामले से जुड़े मुकदमों को आगे बढ़ाने की अनुमति देने के बाद, क्यूबा-अमेरिकी परिवारों में अपनी संपत्ति वापसी की उम्मीदें फिर जगी हैं। ट्रंप का हालिया बयान इसी दबाव की राजनीति का हिस्सा है। क्यूबा के राष्ट्रपति के लिए ट्रंप की अनप्रेडिक्टेबल नीति को संभालना चुनौती भरा होगा। अब देखना यह है कि ईरान से लौटते समय अमेरिकी सेना का क्यूबा में पड़ाव केवल कूटनीतिक दबाव होगा या कोई सैन्य हस्तक्षेप।
🇺🇸🇨🇺⚡️ — President Trump on Cuba:
— Geopolitia (@_geopolitic_) June 5, 2026
It s sort of collapsed.
I like to do one thing at a time. We ll take care of the Islamic Republic of Iran, and as soon as that is done, on our way, back we ll just make a brief stopover. pic.twitter.com/4Dqy2rAEWm
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