चेन्नई: तमिलनाडु की राजनीति में बीजेपी के लिए मिशन दक्षिण हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा है। उत्तर भारत की मोदी लहर का असर दक्षिण के इस किले को आज भी पूरी तरह नहीं भेद पाया है। इसी बीच, बीजेपी के सबसे चर्चित और फायरब्रांड नेता के. अन्नामलाई का इस्तीफा पार्टी के लिए एक बड़े झटके की तरह देखा जा रहा है।
द्रविड़ राजनीति के बीच बीजेपी की जद्दोजहद तमिलनाडु पर 1967 से डीएमके और एआईएडीएमके का एकाधिकार रहा है। बीजेपी दशकों से यहां अपनी पैठ बनाने की कोशिश कर रही है, लेकिन अब तक वह मुख्य धारा की पार्टी नहीं बन सकी। 1998 और 1999 के चुनावों को छोड़ दें, तो पार्टी का प्रदर्शन हमेशा से हाशिये पर रहा है। 2014 के बाद से बीजेपी ने यहां अपनी हिंदुत्ववादी राजनीति और सांगठनिक विस्तार पर जोर जरूर दिया, लेकिन सीटों में तब्दील करना अब भी सबसे कठिन काम बना हुआ है।
अन्नामलाई: 6 साल का सफर और अचानक विदाई पूर्व आईपीएस अधिकारी के. अन्नामलाई ने मात्र 6 साल में पार्टी के भीतर जो जगह बनाई, वह असाधारण थी। 2021 में प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने एन मन्न, एन मक्कल पदयात्रा के जरिए संगठन में नई ऊर्जा फूंकी। हालांकि, शीर्ष नेतृत्व के साथ वैचारिक मतभेद और भविष्य की कार्ययोजना को लेकर बढ़ती दूरियों ने उन्हें इस्तीफा देने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे अब तमिल हितों के लिए नई राजनीति की राह चुनेंगे और 2031 का विधानसभा चुनाव उनका लक्ष्य होगा।
वोट शेयर बढ़ा, लेकिन सीटें नहीं अन्नामलाई के नेतृत्व में बीजेपी की सबसे बड़ी उपलब्धि उसका वोट शेयर रहा है। भले ही चुनाव में सीटें नहीं बढ़ीं, लेकिन बीजेपी का वोट शेयर 3.6% से बढ़कर 11.2% तक पहुंच गया। यह दर्शाता है कि राज्य में बीजेपी के प्रति लोगों का नजरिया बदल रहा है, लेकिन अभी भी वह सत्ता की दहलीज तक पहुंचने से कोसों दूर है।
अब आगे क्या? नेतृत्व का संकट अन्नामलाई के जाने के बाद बीजेपी के सामने सबसे बड़ा सवाल चेहरे का है। नैनार नागेंद्रन और एल. मुरुगन जैसे नेता पार्टी में सक्रिय हैं, लेकिन क्या वे अन्नामलाई जैसी आक्रामक शैली और लोकप्रियता को बरकरार रख पाएंगे? फिलहाल, कन्याकुमारी और कोयंबटूर जैसे चुनिंदा गढ़ों के बाहर पार्टी के लिए जनाधार बढ़ाना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है।
निष्कर्ष बीजेपी के लिए अन्नामलाई का जाना सिर्फ एक इस्तीफे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस प्रयोग का अंत भी है, जिसने पार्टी को पहली बार तमिलनाडु में डबल डिजिट वोट शेयर तक पहुंचाया था। अब देखना यह है कि क्या बीजेपी अपनी पुरानी सांगठनिक ताकत के दम पर इस खालीपन को भर पाएगी, या द्रविड़ दुर्ग की दीवारें और ऊंची हो जाएंगी।
K Annamalai, in his resignation letter to BJP National President Nitin Nabin on June 2, wrote, I do not want to burden the top leadership any further with my ongoing thoughts on the way forward for a growth-oriented and culturally rooted politics in Tamil Nadu. pic.twitter.com/IMnNtcOiul
— ANI (@ANI) June 5, 2026
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