टीएमसी में बड़ी बगावत की आहट! 23 सांसदों के पाला बदलने की चर्चा से ममता की बढ़ी मुश्किलें
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पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आने के संकेत मिल रहे हैं। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर बढ़ता असंतोष पार्टी के लिए बड़ा सिरदर्द बनता जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा गरम है कि टीएमसी के 23 सांसद पार्टी से नाराज हैं और वे किसी वैकल्पिक राजनीतिक विकल्प की तलाश में हैं।

ममता बनर्जी का डैमेज कंट्रोल शुरू पार्टी में टूट की खबरों के बीच टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने मोर्चा संभाल लिया है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी को बिखरने से बचाने के लिए ममता ने विधायकों और वरिष्ठ पदाधिकारियों की तत्काल एक आपातकालीन बैठक बुलाई है। यह बैठक स्पष्ट करती है कि पार्टी नेतृत्व इस असंतोष को हल्के में नहीं ले रहा है।

नाराजगी का असली कारण क्या है? पार्टी के भीतर लंबे समय से टिकट बंटवारे, नेतृत्व की कार्यशैली और भविष्य की रणनीतियों को लेकर मतभेद चल रहे हैं। कई नेता पार्टी के वर्तमान कामकाज के तरीके से खुश नहीं हैं। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि नाराज सांसद वाकई में किसी दूसरी पार्टी (खासकर भाजपा) में जाने की योजना बना रहे हैं या फिर यह महज नेतृत्व पर दबाव बनाने की एक सोची-समझी रणनीति है।

पार्टी ने किया दावों का खंडन दूसरी ओर, टीएमसी के वरिष्ठ नेताओं ने इन सभी खबरों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि पार्टी पूरी तरह एकजुट है और विपक्षी दल जानबूझकर अफवाहें फैलाकर भ्रम की स्थिति पैदा करना चाहते हैं। पार्टी का दावा है कि संगठन पर इनका कोई असर नहीं पड़ने वाला है।

बदलेगा बंगाल का चुनावी समीकरण? विशेषज्ञों का मानना है कि यदि 23 सांसद वास्तव में पाला बदलते हैं, तो यह न केवल टीएमसी के लिए एक बड़ा झटका होगा, बल्कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले बंगाल की पूरी राजनीति का समीकरण भी बदल सकता है।

पार्टी की वर्तमान स्थिति बंगाल की राजनीति में टीएमसी पहले ही मुश्किल दौर से गुजर रही है। 2026 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 206 सीटें जीतकर टीएमसी को मात्र 80 सीटों पर समेट दिया था। इसके बाद से पार्टी के भीतर आंतरिक कलह बढ़ती गई है। हाल ही में संदीपन साहा और ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई में 58 विधायकों ने अलग गुट बनाकर स्वयं को विधानसभा में विपक्ष के रूप में पेश किया है, जिसे उपराज्यपाल की भी मंजूरी मिल चुकी है।

अब सबकी नजरें ममता बनर्जी की बैठक और उसके बाद होने वाले फैसलों पर टिकी हैं। क्या ममता अपने बागी नेताओं को मना पाएंगी या टीएमसी में एक और बड़ा विभाजन होने वाला है? यह आने वाले कुछ दिन ही तय करेंगे।

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