पाकिस्तान और तालिबान के बीच बढ़ती तल्खी अब एक नए मोड़ पर है। अफगानिस्तान ने एक साथ दो बड़े कूटनीतिक दांव चलकर पाकिस्तान की नींद उड़ा दी है। तालिबान अब यह साफ संदेश दे रहा है कि वह क्षेत्रीय राजनीति में पाकिस्तान के दबाव को पूरी तरह नकारने के लिए तैयार है।
चीन की राजधानी बीजिंग में अफगानिस्तान के राजदूत असदुल्लाह करीमी की भारतीय राजदूत विक्रम दोराईस्वामी से मुलाकात ने सबको चौंका दिया है। दोनों देशों ने ऐतिहासिक संबंधों को फिर से मजबूती देने पर चर्चा की है। भारत अब तक अफगानिस्तान को मानवीय सहायता और वैक्सीन भेजकर अपना प्रभाव बढ़ा रहा था, लेकिन अब यह समीकरण रणनीतिक साझेदारी की ओर बढ़ता दिख रहा है। तालिबान का भारत से हाथ मिलाना यह दर्शाता है कि वह पाकिस्तान को दरकिनार कर क्षेत्रीय सहयोग के नए रास्ते खोल रहा है।
बीजिंग की मुलाकात से ठीक पहले तालिबान के कार्यवाहक रक्षा मंत्री मुल्ला याकूब का रूस दौरा भी बेहद अहम है। मॉस्को में तालिबान ने रूस के साथ सैन्य-तकनीकी सहयोग का समझौता किया है। हालांकि इसे आधिकारिक तौर पर पुराने हथियारों की मरम्मत बताया जा रहा है, लेकिन याकूब का तेवर अलग है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अब इस्लामाबाद अफगान सीमा पर हमले की हिम्मत नहीं करेगा।
तालिबान का यह कदम पाकिस्तान के लिए एक कड़ा राजनीतिक और सैन्य संदेश है। तालिबान यह साबित कर रहा है कि वह अपनी सुरक्षा और अस्तित्व के लिए केवल पाकिस्तान पर निर्भर नहीं है। रूस के साथ बढ़ती नज़दीकी और भारत के साथ बढ़ता संवाद यह संकेत है कि जरूरत पड़ने पर तालिबान पाकिस्तान के खिलाफ बड़े अंतरराष्ट्रीय धड़ों को साथ खड़ा कर सकता है।
जानकारों का मानना है कि रूस अभी सैन्य गठबंधन से बच रहा है, लेकिन उसका अफगानिस्तान में दिलचस्पी लेना महत्वपूर्ण है। रूस का मुख्य मकसद अमेरिका और नाटो की दखलअंदाजी को रोकना है, जबकि तालिबान अपनी अंतरराष्ट्रीय वैधता (International Legitimacy) तलाश रहा है।
कुल मिलाकर, तालिबान ने अपनी कूटनीति के जरिए पाकिस्तान को अकेला करने की बिसात बिछा दी है। भारत और रूस के साथ तालमेल बिठाकर तालिबान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य के अफगानिस्तान में पाकिस्तान की मनमानी नहीं चलेगी।
Ambassador met H.E. Mawlawi Asadullah (Bilal Karimi), Ambassador of Afghanistan to China, in Beijing today. Ambassador @VDoraiswami and Ambassador Karimi exchanged views on the historical and civilisational ties between the peoples of the two countries and welcomed continued… pic.twitter.com/jxwYss4uAp
— India in China (@EOIBeijing) June 3, 2026
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