यूक्रेन युद्ध के बाद वैश्विक राजनीति में एक बड़ा मोड़ आ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि रूसी कच्चे तेल की खरीद पर भारत सहित अन्य देशों को मिलने वाली प्रतिबंध छूट (Sanctions Waivers) को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के इस रुख ने नई दिल्ली की कूटनीतिक और आर्थिक चिंताएं बढ़ा दी हैं।
सीनेट की विदेश संबंध समिति के सामने मार्को रूबियो ने स्पष्ट किया कि रूसी तेल पर दी गई रियायतें एक अस्थायी इंतजाम था, जिसका उद्देश्य वैश्विक ऊर्जा कीमतों में स्थिरता लाना था। रूबियो ने संकेत दिया कि अमेरिका अब इन छूटों को जल्द से जल्द खत्म करना चाहता है। 17 जून की इस डेडलाइन के साथ ही भारत पर कूटनीतिक दबाव अपने चरम पर पहुंच गया है।
वॉशिंगटन का तर्क है कि रूसी तेल से होने वाली कमाई सीधे तौर पर मॉस्को के सैन्य अभियानों को आर्थिक मजबूती दे रही है। अमेरिका का मानना है कि वैश्विक ऊर्जा बाजार अब ऐसी स्थिति में है कि रूसी तेल पर निर्भरता को चरणबद्ध तरीके से समाप्त किया जा सकता है। इसी विचारधारा के तहत अमेरिका भारत को रूस से अपनी ऊर्जा आपूर्ति कम करने के लिए मजबूर कर रहा है।
पश्चिमी प्रतिबंधों के दौर में रूस ने भारत को भारी छूट पर कच्चा तेल मुहैया कराया, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था को बड़ी राहत मिली। पेट्रोल-डीजल की कीमतों को नियंत्रित रखने और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने में रूसी तेल ने गेम चेंजर की भूमिका निभाई। भारत का रुख साफ है: उसकी ऊर्जा नीति किसी तीसरे देश के दबाव में नहीं, बल्कि 140 करोड़ नागरिकों के हितों पर आधारित है।
यदि 17 जून के बाद वास्तव में प्रतिबंध लागू होते हैं, तो भारत के सामने कई चुनौतियां होंगी:
भारत ने अब तक अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को साबित किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत पूरी तरह से रूस से मुंह नहीं मोड़ सकता, क्योंकि उसे ऊर्जा सुरक्षा के लिए सस्ती सप्लाई की जरूरत है। हालांकि, अमेरिका के व्यापारिक दबाव (टैरिफ की धमकी) और कूटनीतिक दबाव के बीच भारत को एक संतुलित रास्ता अपनाना होगा।
अब देखना यह होगा कि 17 जून के बाद क्या भारत अपनी ऊर्जा स्वायत्तता बरकरार रख पाता है या उसे अमेरिका की शर्तों के आगे झुकना पड़ेगा। इस पूरे मामले पर दुनिया भर की नजरें टिकी हैं।
🇺🇲US want to end sanction waiver on 🇷🇺Russian oil for 🇮🇳India & 🇨🇳China «as soon as possible», says US Secretary of State Marco Rubio pic.twitter.com/XzGHdeZYdh
— Lisa Singh (@YakushinaLisa) June 2, 2026
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