शरद पवार को बड़ा झटका: पूर्व मंत्री प्राजक्त तनपुरे ने थामा भाजपा का दामन
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महाराष्ट्र की राजनीति में शनिवार को एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री प्राजक्त तनपुरे ने भाजपा का दामन थाम लिया है। मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण और पूर्व सांसद सुजय विखे पाटिल की मौजूदगी में उन्होंने पार्टी की सदस्यता ली।

विकास कार्यों को बताया प्राथमिकता भाजपा में शामिल होने के बाद प्राजक्त तनपुरे ने कहा कि वे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और अन्य वरिष्ठ नेताओं की कार्यशैली से प्रेरित हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके विधानसभा क्षेत्र के किसानों की समस्याओं, सिंचाई और बुनियादी विकास के कार्यों का समाधान उनकी पहली प्राथमिकता है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि पार्टी उन्हें जो भी जिम्मेदारी देगी, उसे पूरी निष्ठा के साथ निभाएंगे।

विधान परिषद उम्मीदवारी की चर्चा राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि भाजपा जल्द ही प्राजक्त तनपुरे को बड़ा इनाम दे सकती है। माना जा रहा है कि उन्हें अहिल्यानगर स्थानीय स्वराज्य संस्था निर्वाचन क्षेत्र से विधान परिषद का उम्मीदवार बनाया जा सकता है। हालांकि, भाजपा नेतृत्व ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है।

शरद पवार गुट के लिए बड़ा नुकसान प्राजक्त तनपुरे के अचानक पार्टी छोड़ने पर शरद पवार गुट के नेता जयंत पाटिल ने दुख व्यक्त किया है। उन्होंने स्वीकार किया कि यह पार्टी के लिए एक बड़ा झटका है। पाटिल ने कहा कि तनपुरे ने शायद अपने क्षेत्र की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए यह फैसला लिया होगा। उन्होंने यह भी बताया कि इस फैसले से पहले तनपुरे की उनसे कोई औपचारिक बातचीत नहीं हुई थी।

लंबे समय से थी अटकलें तनपुरे का भाजपा की ओर झुकाव तब साफ हो गया था, जब उन्होंने राहुरी विधानसभा उपचुनाव से ऐन वक्त पर अपना नाम वापस ले लिया था। उस समय भी अंदरूनी बातचीत की खबरें आई थीं। पूर्व सांसद सुजय विखे पाटिल ने पहले ही संकेत दिए थे कि जल्द ही बड़े नेता भगवा खेमे में शामिल होंगे।

अहिल्यानगर में बदलेंगे समीकरण तनपुरे के भाजपा में आने से अहिल्यानगर जिले की राजनीति पूरी तरह बदल गई है। विधान परिषद चुनाव से ठीक पहले यह घटनाक्रम महायुति गठबंधन के लिए एक बड़ी मजबूती के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि शरद पवार गुट अपने इस मजबूत गढ़ को बचाने के लिए क्या रणनीति अपनाता है।

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