वीर सावरकर की जयंती के अवसर पर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के प्रमुख राज ठाकरे ने सोशल मीडिया पर एक तीखी टिप्पणी की है। उन्होंने न केवल सावरकर को श्रद्धांजलि दी, बल्कि उनके नाम पर हो रही सियासत और महाराष्ट्र की वर्तमान स्थिति पर भी कड़ा प्रहार किया।
राजनीतिक स्वार्थ पर सवाल राज ठाकरे ने सीधे तौर पर उन नेताओं पर निशाना साधा जो केवल वोट बैंक के लिए सावरकर का महिमामंडन करते हैं। उन्होंने पूछा, जो लोग आज सावरकर के नाम का इस्तेमाल कर रहे हैं, क्या उन्होंने कभी उनकी रचनाएं पढ़ी हैं? सावरकर तो एक तर्कवादी और वैज्ञानिक सोच वाले दार्शनिक थे, जो किसी भी विचार को तर्क की कसौटी पर परखने के समर्थक थे।
व्हाट्सप्प यूनिवर्सिटी और पाखंड का बोलबाला मनसे प्रमुख ने महाराष्ट्र की वर्तमान स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि आज राज्य में बिना सोचे-समझे व्हाट्सप्प यूनिवर्सिटी में आई बातों को सच मान लेने की होड़ मची है। उन्होंने कहा कि आज के नेता ढोंगी बाबाओं और पाखंडियों के जाल में फंस रहे हैं, जिससे राज्य की गौरवशाली बौद्धिक विरासत पीछे छूट रही है।
जातिवाद की राजनीति पर प्रहार सावरकर के विचारों का जिक्र करते हुए राज ठाकरे ने याद दिलाया कि सावरकर जाति प्रथा के कट्टर विरोधी थे। उन्होंने अफसोस जताया कि आज उसी महाराष्ट्र में जाति के नाम पर हिंसा और विभाजन फैलाया जा रहा है। ठाकरे ने आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल ही इस वैमनस्य को हवा दे रहे हैं।
महाराष्ट्र के भविष्य पर गंभीर चिंता राज ठाकरे ने चेतावनी दी कि यदि महाराष्ट्र अपने गौरवशाली अतीत को भूलकर सत्ता के भूखे नेताओं के बहकावे में चलता रहा, तो भविष्य पूरी तरह से अंधकारमय हो जाएगा। उन्होंने कहा कि सावरकर को सच्ची श्रद्धांजलि तभी मिलेगी, जब हम हर विचार को तार्किक बुद्धि की कसौटी पर कसना सीखेंगे।
औपचारिकता से आगे देखने की जरूरत अंत में, मनसे प्रमुख ने स्पष्ट संदेश दिया कि सावरकर जयंती केवल एक औपचारिकता नहीं होनी चाहिए। उन्होंने लोगों से अपनी विरासत को समझने और व्यक्तिगत रूप से सत्य और असत्य के बीच अंतर करने की अपील की। उनके इस पोस्ट ने महाराष्ट्र की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है।
आज स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर यांची जयंती. सावरकर हे हिंदू राष्ट्रवाद मांडणारे तत्वज्ञ होते, क्रियाशील धर्मसुधारक, समाजसुधारक होते, आणि तितकेच विज्ञाननिष्ठ पण होते. सावरकर हे माझ्या मते देशातील एक असे महापुरुष आहेत, की त्यांच्या टीकाकारांना पूर्ण सावरकर कधी कळले नाहीत… pic.twitter.com/6kmRO5jthI
— Raj Thackeray (@RajThackeray) May 28, 2026
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