भारत ने अपनी विदेश नीति में एक बड़ा साहसिक कदम उठाते हुए भूमध्यसागर (Mediterranean) में अपनी पैठ बना ली है। परंपरागत रूप से अमेरिका और रूस की कूटनीति के इर्द-गिर्द रहने वाला भारत अब सीधे तौर पर साइप्रस के साथ मिलकर वैश्विक रणनीतिक संतुलन को बदलने की तैयारी में है।
रणनीतिक साझीदारी और रक्षा रोडमैप हाल ही में साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलाइड्स की भारत यात्रा के बाद, दोनों देशों ने संबंधों को पूर्ण रणनीतिक साझेदारी के स्तर पर पहुंचा दिया है। सबसे महत्वपूर्ण कदम 2026-2031 के लिए रक्षा सहयोग रोडमैप है। यह समझौता न केवल रक्षा उपकरणों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देगा, बल्कि भविष्य में संयुक्त रक्षा उत्पादन (Co-production) का रास्ता भी साफ करेगा।
इस्लामिक नाटो के लिए बड़ा झटका यह कदम पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब के बढ़ते सुन्नी गठबंधन—जिसे इस्लामिक नाटो कहा जा रहा है—के लिए एक सीधा संदेश है। तुर्की लंबे समय से कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान का खुलकर समर्थन करता रहा है और साइप्रस के साथ उसके पुराने विवाद हैं। अब भारत का साइप्रस के साथ रक्षा गठबंधन तुर्की और पाकिस्तान की चिंताएं बढ़ा रहा है।
ब्रह्मोस और आकाश मिसाइलों की तैनाती की अटकलें तुर्की के मीडिया में इस बात को लेकर खलबली मची हुई है कि साइप्रस भारत से ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलें और आकाश मिसाइल सिस्टम खरीद सकता है। यदि ऐसा होता है, तो भूमध्यसागरीय क्षेत्र में पहली बार भारतीय हथियारों की तैनाती होगी। यह क्षेत्र में तुर्की की सैन्य दादागिरी के खिलाफ एक बड़ा रणनीतिक संतुलन साबित हो सकता है।
जिमनिच बैठक में जयशंकर की मौजूदगी विदेश मंत्री एस. जयशंकर इस समय साइप्रस की यात्रा पर हैं, जहां वे यूरोपीय संघ के विदेश मंत्रियों की अनौपचारिक बैठक जिमनिच (Gymnich) में भाग ले रहे हैं। इस मंच पर जयशंकर की उपस्थिति यह दर्शाती है कि भारत अब केवल हिंद-प्रशांत क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि वह पूर्वी भूमध्यसागर और यूरोप की सुरक्षा संरचनाओं में भी अपनी सक्रिय भूमिका निभाने को तैयार है।
आतंकवाद पर कड़ा रुख भारत और साइप्रस ने सीमा पार आतंकवाद की साझा चुनौतियों पर भी स्पष्ट रुख अपनाया है। दोनों देशों ने जम्मू-कश्मीर सहित अन्य आतंकी घटनाओं की कड़ी निंदा की है। यह स्पष्ट है कि भारत अब उन देशों के साथ मजबूती से खड़ा हो रहा है जो वैश्विक आतंकवाद के खिलाफ भारत की जीरो टॉलरेंस नीति का समर्थन करते हैं।
नेतन्याहू का षट्भुजीय गठबंधन इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने जिस षट्भुजीय गठबंधन (Hexagonal Alliance) का सपना देखा था, यह भारत-साइप्रस डील उसी दिशा में एक ठोस कदम है। इसमें भारत, ग्रीस, साइप्रस और मध्य-पूर्व के देशों के बीच एक ऐसा नेटवर्क बनाने की परिकल्पना है, जो आर्थिक गलियारे (IMEC) को सुरक्षा प्रदान कर सके और क्षेत्रीय स्थिरता का आधार बन सके।
*🚨Why India’s Defence Deal with Cyprus is Becoming a Strategic Nightmare for Turkey and Pakistan
— Not Just Headlines (@Notjustheadline) May 28, 2026
For years, Turkey openly supported Pakistan on Kashmir at global platforms, while simultaneously deepening defense cooperation with Pakistan through drones, military hardware, and… pic.twitter.com/BJWROcGy37
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