बिहार में गुंडाराज : छापेमारी करने गई पुलिस की ही ली गई तलाशी, कौन हैं सोनू-मोनू जिनका कानून भी मानता है लोहा?
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बिहार के मोकामा से एक ऐसा वीडियो सामने आया है जिसने पूरे राज्य की पुलिस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नौरंगा जलालपुर गांव का यह वाकया सुशासन के दावों की धज्जियां उड़ाने के लिए काफी है। यहां छापेमारी करने पहुंची पुलिस को पहले लाइन में खड़े होकर अपनी तलाशी देनी पड़ी, उसके बाद ही उन्हें घर के अंदर जाने की अनुमति मिली।

क्या है पूरा मामला? मामले की शुरुआत गांव के पैक्स अध्यक्ष और सरपंच प्रतिनिधि मुकेश कुमार की एक सोशल मीडिया पोस्ट से हुई। इस पोस्ट को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि पंचायत बुलानी पड़ी। आरोप है कि बातचीत के दौरान अचानक गोलियां चलीं, जिससे गांव में दहशत फैल गई। सूचना मिलते ही कई थानों की पुलिस सोनू और मोनू नाम के दो भाइयों के घर छापेमारी करने पहुंची।

वीडियो में क्या दिखा? वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि वर्दीधारी पुलिसकर्मी एक कतार में खड़े हैं। एक युवक, जिसने केवल गंजी और जांघिया पहना हुआ है, बेहद बेखौफ होकर पुलिसकर्मियों की तलाशी ले रहा है। यह दृश्य न केवल हैरान करने वाला है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि इलाके में इन दबंगों का खौफ कितना गहरा है कि पुलिस को भी उनके सामने नतमस्तक होना पड़ा।

कौन हैं सोनू-मोनू? नौरंगा जलालपुर के रहने वाले सोनू और मोनू का नाम मोकामा इलाके में चर्चा का विषय बना रहता है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, इनके पिता एक वकील हैं और ये दोनों भाई ईंट-भट्ठा कारोबार की आड़ में अपराधी गतिविधियों में शामिल रहे हैं। हत्या, अपहरण और रंगदारी जैसे संगीन मामलों में इनका नाम पहले भी सामने आता रहा है।

कभी छोटे सरकार के थे करीबी क्षेत्रीय चर्चाओं के अनुसार, ये दोनों भाई कभी बाहुबली नेता अनंत सिंह (छोटे सरकार) के बेहद करीबी हुआ करते थे। हालांकि, समय के साथ पंचायत चुनाव और वर्चस्व की लड़ाई ने रिश्तों में कड़वाहट घोल दी। साल 2017-18 में अनंत सिंह की हत्या की साजिश रचने के आरोप में भी इनका नाम उछला था। इतना ही नहीं, सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इनके तार उत्तर प्रदेश के बड़े गैंग्स से भी जुड़े हो सकते हैं।

फिलहाल क्या है स्थिति? फिलहाल पूरे गांव में तनाव का माहौल है और भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। पुलिस लगातार दबिश दे रही है, लेकिन सोनू-मोनू की दहशत के कारण ग्रामीण खुलकर कुछ भी बोलने से कतरा रहे हैं। कानून-व्यवस्था के नाम पर पुलिस की इस लाचारी ने जनता के बीच सुरक्षा के दावों पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। अब देखना यह है कि क्या प्रशासन इन दबंगों पर शिकंजा कस पाएगा या पुलिस की यह तलाश महज खानापूर्ति बनकर रह जाएगी।

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