हीटवेव अलर्ट 2026: उत्तर से दक्षिण तक आग उगलता भारत, 30 शहरों का पारा पहुंचा 47°C के पार
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मई 2026 की भीषण गर्मी ने देश में पुराने सभी रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, उत्तर, मध्य और पूर्वी भारत के बड़े हिस्से तंदूर में तब्दील हो चुके हैं। तापमान 44°C से 48°C के बीच रहने से आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।

IMD का हीट मैप: भारत के विस्तृत हिस्से रेड जोन में

मौसम विभाग के लेटेस्ट हीट मैप के अनुसार, देश का एक बड़ा हिस्सा गहरे लाल और मैरून रंग (42°C से 48°C+) में है, जो अत्यधिक खतरनाक स्थिति को दर्शाता है। राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, विदर्भ, छत्तीसगढ़, ओडिशा और तेलंगाना सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। राहत केवल हिमालयी क्षेत्रों, पूर्वोत्तर राज्यों और केरल के कुछ हिस्सों तक सीमित है।

यूपी-राजस्थान और विदर्भ का बुरा हाल

इस गर्मी में विदर्भ का ब्रह्मपुरी (47.2°C) देश का सबसे गर्म स्थान बन गया है। उत्तर प्रदेश भी भीषण लू की चपेट में है, जहां बांदा (46.8°C), प्रयागराज और झांसी जैसे शहर 45°C - 46°C के बीच तप रहे हैं। वहीं, राजस्थान के श्रीगंगानगर और हरियाणा के रोहतक में भी पारा 45°C से 46°C के आसपास बना हुआ है, जिससे दिन में सड़कों पर सन्नाटा पसर रहा है।

टॉप-30 गर्म शहरों की सूची (24 मई 2026)

देश के शीर्ष 30 गर्म शहरों में विदर्भ और ओडिशा का दबदबा है:

  1. ब्रह्मपुरी (विदर्भ): 47.2°C
  2. बांदा (यूपी): 46.8°C
  3. श्रीगंगानगर (राजस्थान): 46.0°C
  4. बापटला (आंध्र प्रदेश): 46.0°C
  5. रेंटाचिंतला (आंध्र प्रदेश): 46.0°C (इसके अलावा ओडिशा के टिटलागढ़, बौध और मध्य प्रदेश के खजुराहो में भी पारा 45.8°C तक रिकॉर्ड किया गया।)

स्वास्थ्य पर डबल अटैक : सावधानी ही एकमात्र बचाव

45°C से अधिक तापमान हीट स्ट्रोक (लू) का बड़ा कारण बन रहा है। बच्चे, बुजुर्ग और बाहरी काम करने वाले श्रमिक सबसे ज्यादा जोखिम में हैं। अस्पतालों में हीट स्ट्रोक के मामलों में भारी बढ़ोतरी देखी जा रही है।

IMD की महत्वपूर्ण सलाह:

कब मिलेगी राहत?

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, मई के अंत और जून के पहले सप्ताह तक गर्मी का कहर जारी रहेगा। मानसून के आने में अभी समय है, इसलिए अगले 48 घंटों के लिए रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। जलवायु परिवर्तन के चलते गर्मी की यह तीव्रता अब एक वार्षिक चुनौती बनती जा रही है, जिसके लिए दीर्घकालिक जल संरक्षण और वृक्षारोपण ही एकमात्र स्थायी समाधान हैं।

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