ईरान पर हमले के संकेत? मार्को रूबियो ने युद्ध और परमाणु हथियार को लेकर तोड़ी चुप्पी
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भारत दौरे पर मौजूद अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने ईरान के साथ बढ़ते तनाव पर बड़ा बयान दिया है। जब उनसे यह सवाल किया गया कि क्या ईरान पर सैन्य हमले की तैयारी है, तो रूबियो ने कूटनीति के साथ-साथ सख्त चेतावनी भी दी।

अभी बातचीत जारी, पर विकल्प खुले हैं रूबियो ने स्पष्ट किया कि फिलहाल ईरान के साथ कूटनीतिक बातचीत चल रही है। हालांकि, उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अमेरिका ने यह तय कर लिया है कि ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को हर हाल में खोलना होगा और उसे परमाणु हथियार कभी नहीं बनाने दिए जाएंगे। अगर कूटनीति विफल रहती है, तो रूबियो ने सैन्य कार्रवाई की संभावना से भी इनकार नहीं किया।

वॉशिंगटन में हाई-लेवल मीटिंग खबर है कि शुक्रवार को ट्रंप ने व्हाइट हाउस में अपने शीर्ष सुरक्षा और सैन्य अधिकारियों के साथ एक अहम बैठक की। इसमें रक्षा मंत्री, सीआईए चीफ और राष्ट्रीय सुरक्षा टीम शामिल थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बैठक का मुख्य एजेंडा ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य विकल्पों और भविष्य की रणनीति पर विचार करना था।

ट्रंप की प्राथमिकता: शादी से ज्यादा देश की सुरक्षा तनाव के बीच राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने बेटे की शादी में जाने का कार्यक्रम रद्द कर दिया है। ट्रंप का कहना है कि इस संवेदनशील वक्त में वाशिंगटन में रहकर देश की सुरक्षा पर ध्यान देना उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने सीधे तौर पर स्वीकार किया कि ईरान युद्ध जैसे हालात के बीच उनका शादी में जाना उचित नहीं था।

अमेरिका की सैन्य घेराबंदी केवल बयान ही नहीं, बल्कि जमीन पर भी हलचल तेज है। अमेरिकी मीडिया के अनुसार, कैरेबियन क्षेत्र में अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर और युद्धपोतों की तैनाती बढ़ा दी गई है। यह ईरान पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की एक सोची-समझी रणनीति मानी जा रही है।

रूबियो की दो टूक चेतावनी रूबियो ने इंटरव्यू में कहा, ईरान होर्मुज में जो कर रहा है, वह अवैध और खतरनाक है। वे कमर्शियल जहाजों को निशाना बना रहे हैं। ईरान की समस्या का समाधान किसी न किसी तरह से होना ही चाहिए। या तो कूटनीति से या फिर किसी और तरीके से (सैन्य विकल्प)। हम ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं देंगे।

फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें अमेरिका और ईरान के बीच चल रही इस तनावपूर्ण बातचीत पर टिकी हैं। रूबियो के बयानों से यह साफ है कि अमेरिका अपनी जीरो टॉलरेंस नीति पर कायम है।

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