ट्विशा शर्मा मौत मामला: 10:50 या 12:05 बजे —मौत के समय में छिपी बड़ी साजिश?
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भोपाल का चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामला अब एक ऐसी उलझन बन गया है, जो हर दिन नए और गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, सबूतों और बयानों का विरोधाभास इस केस को आत्महत्या से बदलकर किसी गहरी साजिश की तरफ इशारा कर रहा है।

मौत के समय पर उलझा समय का चक्र मामले की सबसे बड़ी कड़ी यानी मौत का समय ही सबसे संदिग्ध है। ट्विशा की सास और पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह का दावा है कि उन्होंने ट्विशा को 12 मई की रात 10:50 बजे एम्स पहुँचाया था। लेकिन, एम्स का आधिकारिक रिकॉर्ड कुछ और ही कहता है—वहां ट्विशा को रात 12:05 बजे लाए जाने का समय दर्ज है। डेढ़ घंटे का यह अंतर पुलिस की थ्योरी पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।

सीसीटीवी में कैद विसंगतियां सीसीटीवी फुटेज में सामने आई टाइमिंग ने जांच को और पेचीदा बना दिया है। फुटेज के अनुसार, ट्विशा शाम 7:20 बजे छत पर जाती दिखती हैं, जबकि रात 8:17 बजे तीन लोग उनके शरीर को नीचे उतारते हुए दिखाई दे रहे हैं। ये फुटेज और अस्पताल के रिकॉर्ड के बीच का फासला साबित करता है कि जो बताया जा रहा है, हकीकत उससे कोसों दूर है।

पति समर्थ फरार, इनाम घोषित ट्विशा के पति समर्थ सिंह पर शक की सुई तब और गहरी हुई जब वह फरार हो गया। समर्थ की अग्रिम जमानत याचिका खारिज हो चुकी है और पुलिस ने उसे पकड़ने के लिए 10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है। परिवार ने पुलिस कमिश्नर से उसकी संपत्ति कुर्क करने की मांग की है, ताकि वह सामने आने पर मजबूर हो।

दिल्ली एम्स में दोबारा पोस्टमार्टम की मांग ट्विशा का पार्थिव शरीर पिछले आठ दिनों से एम्स भोपाल की मॉर्चरी में रखा है। परिजनों का आरोप है कि भोपाल एम्स की रिपोर्ट और प्रक्रिया के साथ छेड़छाड़ हो सकती है, इसलिए उन्होंने दिल्ली एम्स में दोबारा पोस्टमार्टम की मांग की है। वकील अंकुर पांडे ने आरोप लगाया कि ट्विशा की लंबाई तक को रिकॉर्ड में गलत (161 सेमी के बजाय 172-173 सेमी) दर्ज किया गया है, जो जांच को भटकाने की साजिश है।

ससुराल पक्ष पर उठे सवाल ट्विशा के भाई मेजर हर्षित ने अपनी मां की ओर से उठाए गए दावों को खारिज करते हुए कहा कि घटना की पहली कॉल ससुराल से नहीं, बल्कि मायके से की गई थी। उन्होंने सवाल किया कि एक पूर्व जज होने के बावजूद गिरिबाला सिंह ने तुरंत पुलिस को सूचना क्यों नहीं दी? परिवार का आरोप है कि घर में काम करने वाले लोगों के बयान तक नहीं लिए गए, जो इस घटना के प्रत्यक्षदर्शी हो सकते थे।

फिलहाल, न्याय की आस में बैठा ट्विशा का परिवार एक ही मांग कर रहा है—सच सामने आए। क्या एम्स के मेडिकल रिकॉर्ड में हेराफेरी की गई? और क्या समर्थ का प्रभाव जांच को प्रभावित कर रहा है? इन सवालों के जवाब अब दिल्ली एम्स की रिपोर्ट ही दे सकती है।

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