ट्रंप या पुतिन: बीजिंग में किसे मिला ज्यादा सम्मान? चीन की कूटनीति के 3 बड़े संकेत
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बीजिंग यात्रा के महज एक हफ्ते बाद रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी चीन पहुंचे। दोनों ही नेताओं का भव्य स्वागत हुआ, रेड कार्पेट बिछाए गए और गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। हालांकि, चीन के बदले हुए राजनयिक प्रोटोकॉल ने वाशिंगटन से लेकर मॉस्को तक एक नई चर्चा शुरू कर दी है कि आखिर बीजिंग ने किसे अधिक महत्व दिया।

ट्रंप की यात्रा: रेड कार्पेट और प्रतीकात्मक स्वागत डोनाल्ड ट्रंप अपनी 13 से 15 मई की यात्रा के दौरान अपने रक्षा और विदेश मंत्रियों के साथ बीजिंग पहुंचे। एयरपोर्ट पर उनके स्वागत के लिए चीन के उपराष्ट्रपति मौजूद थे। शी जिनपिंग ने ट्रंप को अपने निजी गार्डन में समय बिताने के लिए आमंत्रित किया, जिसे ट्रंप ने काफी खास बताया। हालांकि, दोनों के बीच हुई व्यापारिक और अन्य डील्स का विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया।

पुतिन का दौरा: 40 बड़े समझौतों की ठोस नींव 19 मई को पुतिन जब बीजिंग उतरे, तो उनका स्वागत स्वयं विदेश मंत्री वांग यी ने किया। पुतिन अपने साथ उद्योगपतियों और विदेश मंत्री लावरोव को लेकर पहुंचे हैं। इस दौरे पर दोनों देशों के बीच रेल कनेक्टिविटी समेत कुल 40 समझौतों पर हस्ताक्षर होने हैं। पुतिन और शी जिनपिंग ने बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था की वकालत की है और मिडिल ईस्ट जैसे संवेदनशील मुद्दों पर अपनी साझा रणनीति स्पष्ट की है।

किसे मिली ज्यादा तरजीह? कूटनीति के 3 प्वॉइंट्स

  1. पद का ओहदा और प्रभाव: ट्रंप का स्वागत उपराष्ट्रपति ने किया, जो वर्तमान में न तो पोलित ब्यूरो के सदस्य हैं और न ही कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति में शामिल हैं। इसके विपरीत, पुतिन का स्वागत विदेश मंत्री वांग यी ने किया, जो चीन के अत्यंत शक्तिशाली पोलित ब्यूरो के सदस्य हैं।

  2. बीजिंग का संदेश: कूटनीतिक जानकारों के अनुसार, चीन में किसी व्यक्ति का कद पोलित ब्यूरो की सदस्यता से मापा जाता है। हवाई अड्डे पर पोलित ब्यूरो के सदस्य को भेजना यह स्पष्ट संकेत है कि बीजिंग पुतिन को एक विशेष रूप से महत्वपूर्ण और रणनीतिक पार्टनर के रूप में देखता है।

  3. रूस का रुख: इस तुलनात्मक चर्चा के बीच रूसी राष्ट्रपति के प्रेस सचिव दिमित्री पेस्कोव ने स्पष्ट किया कि प्रोटोकॉल की तुलना करने का कोई ठोस आधार नहीं है। उनके अनुसार, चीन के लिए दिखावे से कहीं अधिक महत्वपूर्ण उन समझौतों और संवादों की विषयवस्तु है, जो इस यात्रा के दौरान तय किए गए हैं।

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