पुतिन का बीजिंग में वॉर्म वेलकम : क्या अमेरिका के खिलाफ बन रहा नया पावर ब्लॉक?
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रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन चीन पहुंच गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति के चीन दौरे के महज एक हफ्ते बाद हुई यह यात्रा वैश्विक राजनीति में हलचल मचा रही है। बीजिंग में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पुतिन का जोरदार स्वागत किया, जो दोनों देशों के बीच गहरी होती जुगलबंदी का संकेत है।

अहम एजेंडा: ऊर्जा और कूटनीति पुतिन अपनी दो दिवसीय यात्रा के दौरान शी जिनपिंग के साथ आर्थिक सहयोग, ऊर्जा साझेदारी और क्षेत्रीय सुरक्षा पर विस्तार से चर्चा करेंगे। क्रेमलिन के अनुसार, इस वार्ता का मुख्य केंद्र वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य में दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को और अधिक मजबूत बनाना है।

मैत्री संधि की 25वीं वर्षगांठ यह दौरा 2001 में हुई चीन-रूस मैत्री संधि के 25 साल पूरे होने के मौके पर हो रहा है। 2022 में यूक्रेन युद्ध की शुरुआत के बाद से इन रिश्तों ने नई ऊंचाइयां छुई हैं। पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बावजूद, चीन रूस का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार और रूसी तेल-गैस का सबसे बड़ा खरीदार बनकर उभरा है।

यूक्रेन युद्ध पर बीजिंग का रुख बीजिंग ने औपचारिक रूप से यूक्रेन युद्ध पर तटस्थ रहने का नाटक किया है, लेकिन व्यवहार में रूस का साथ देकर उसने रणनीतिक भरोसा कायम रखा है। पुतिन ने अपनी यात्रा से पहले कहा कि रूस-चीन संबंध अब अभूतपूर्व स्तर पर हैं और दोनों देश वैश्विक स्थिरता के लिए बेहद जरूरी हैं।

क्या यह अमेरिका के खिलाफ एक जवाब है? हालांकि रूसी अधिकारियों का कहना है कि पुतिन की यह यात्रा पहले से तय थी और इसका अमेरिकी राष्ट्रपति की यात्रा से कोई संबंध नहीं है, लेकिन विशेषज्ञ इसे अलग नजरिए से देख रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि बीजिंग एक ऐसी शक्ति के रूप में खुद को पेश कर रहा है जो पश्चिम के साथ संबंध बनाए रखते हुए रूस के साथ अपनी सदाबहार दोस्ती को भी अटूट रखे।

पुराने मित्रों की गहरी केमिस्ट्री पुतिन का सितंबर 2025 में हुआ पिछला दौरा और शी जिनपिंग के साथ उनकी व्यक्तिगत बॉन्डिंग जगजाहिर है। जब शी जिनपिंग ने पुतिन को अपना पुराना मित्र कहा था, तो यह केवल औपचारिक शब्दों से परे दोनों देशों के बीच मौजूदा राजनीतिक तालमेल की गहराई को दर्शाता है। आज की वैश्विक परिस्थितियों में यह दोस्ती अमेरिका के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

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