ईरान पर अमेरिका का दो टूक: या तो समझौता मंजूर करो या फिर जंग के लिए तैयार रहो
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अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान के साथ चल रही शांति वार्ता को लेकर बेहद सख्त रुख अपना लिया है। व्हाइट हाउस में मीडिया से बातचीत करते हुए वेंस ने स्पष्ट कर दिया है कि ईरान के पास अब केवल दो ही विकल्प बचे हैं—या तो वह अमेरिका के साथ एक ठोस शांति समझौता करे, या फिर सैन्य हमलों को झेलने के लिए तैयार रहे।

साढ़े पांच हफ्ते की जंग और ट्रंप की प्राथमिकता जेडी वेंस ने बताया कि ईरान के साथ सक्रिय सैन्य टकराव की अवधि अब तक साढ़े पांच हफ्ते की रही है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप किसी भी कीमत पर कभी न खत्म होने वाले युद्ध में उलझना नहीं चाहते। ट्रंप का मानना है कि सैन्य ऑपरेशनों को फिर से शुरू करने के बजाय एक संतुलित समझौता करना बेहतर है।

परमाणु हथियारों की होड़ का डर ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर चिंता जताते हुए वेंस ने कहा कि अगर ईरान परमाणु शक्ति संपन्न बनता है, तो इससे पूरी दुनिया में परमाणु हथियारों की अंधी दौड़ शुरू हो जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ईरानी शासन शांति वार्ता में विफल रहता है, तो अमेरिका अपने सैन्य अभियानों को फिर से शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

इस्लामाबाद वार्ता और अरब देशों का दबाव उपराष्ट्रपति ने बताया कि इस्लामाबाद में हुई हालिया बातचीत का मुख्य उद्देश्य लंबे समय से चले आ रहे गतिरोध को खत्म कर संवाद की राह खोलना था। गौरतलब है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान पर सैन्य हमले के फैसले को फिलहाल टाल दिया है। यह कदम कतर और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे अरब देशों के अनुरोध पर उठाया गया है, जिन्होंने संकेत दिया है कि ईरान अब बातचीत के लिए अधिक लचीला रुख अपना रहा है।

ईरान समझौते के लिए बेताब वहीं, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वॉशिंगटन में दावा किया कि ईरान इस समय समझौते के लिए बुरी तरह बेताब है। उन्होंने दो टूक कहा, अमेरिका ईरान में चल रहे तनाव को जल्द ही खत्म कर देगा। हम अपना काम पूरा करेंगे और फिर अपने सैनिकों को घर वापस बुला लेंगे।

वेंस के इन बयानों से साफ है कि अमेरिका ने ईरान के सामने आर-पार की स्थिति खड़ी कर दी है। आने वाले कुछ दिन यह तय करेंगे कि मध्य-पूर्व में शांति कायम होती है या फिर बारूद का धुआं एक बार फिर आसमान को घेरेगा।

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