मॉडल ट्विशा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह ने इस मामले की जांच और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि पीड़ित परिवार के आरोपों में दम है और जांच एजेंसी की भूमिका संदिग्ध है।
FIR में देरी और अक्षम्य लापरवाही पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह ने कहा कि मामले में प्रथम दृष्टया भारी लापरवाही देखी गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि घटना के दो दिन बाद तक एफआईआर दर्ज क्यों नहीं की गई? उन्होंने इसे अक्षम्य बताते हुए कहा कि मृतका के शरीर पर मौजूद एंटी-मॉर्टम इंजरी और फांसी का तरीका जिस तरह बताया जा रहा है, वह पूरी तरह अविश्वसनीय है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, क्या आपने कभी सुना है कि कोई पेटी (बॉक्स) से फांसी लगाकर लटक सकता है? ये बातें गले से नहीं उतर रहीं।
SIT की निष्पक्षता पर बड़ा सवालिया निशान मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा गठित एसआईटी की विश्वसनीयता पर भी विक्रम सिंह ने संदेह जताया है। उन्होंने कहा कि आरोपी सास जो एक रिटायर्ड जज हैं, उन्हें तुरंत अग्रिम जमानत मिल जाना और पति समर्थ सिंह का भूमिगत हो जाना जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने डर जताया कि आरोपी पति को भी जल्द ही जमानत मिल सकती है, जो न्याय की राह में बड़ी बाधा है।
परिवार के साथ दुर्व्यवहार का आरोप पूर्व डीजीपी ने पीड़ित परिवार के प्रति प्रशासन के रवैये की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि जब परिवार न्याय की गुहार लेकर कोर्ट पहुंचा, तो वहां महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार किया गया और उन्हें डराने-धमकाने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा, वरिष्ठ अधिकारियों से मिलने से रोकना एक संवेदनशील प्रशासन की विफलता है। बच्ची तो वापस नहीं आती, लेकिन उनके आंसू पोछने की मौलिक जिम्मेदारी निभाने में भी तंत्र नाकाम रहा।
पुलिस का एक्शन: पति के खिलाफ लुकआउट नोटिस विवाद बढ़ता देख पुलिस ने अब कार्रवाई में तेजी दिखाई है। मॉडल ट्विशा की मौत के मुख्य आरोपी और पति समर्थ सिंह के खिलाफ पुलिस ने लुकआउट नोटिस जारी कर दिया है। पुलिस की कई टीमें मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों में उसकी तलाश में दबिश दे रही हैं। वहीं, इस मामले में हाल ही में सामने आए सीसीटीवी फुटेज और बहन नैना के खुलासों ने जांच को एक नया मोड़ दे दिया है।
लेखक: सनातन कुमार
VIDEO | Twisha Sharma death case: Former Uttar Pradesh DGP Vikram Singh said, Prima facie, if you see, the filing of FIR was deliberately delayed. Why was the FIR registered two days later? There are anti-mortem injuries on the deceased s body... It is a relief that the Madhya… pic.twitter.com/qVRnw5DQWK
— Press Trust of India (@PTI_News) May 19, 2026
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