14 साल बाद सुपरकॉप दामयंती सेन की ऐतिहासिक वापसी, सुवेंदु सरकार ने सौंपी बड़ी जिम्मेदारी
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पश्चिम बंगाल की राजनीति और पुलिस महकमे में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने 1996 बैच की तेज-तर्रार आईपीएस अधिकारी दामयंती सेन को मुख्यधारा में वापस लाकर सबको चौंका दिया है। 14 साल तक हाशिए पर रहीं सेन अब महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों की जांच करने वाली हाई-प्रोफाइल कमेटी में सदस्य सचिव (Member Secretary) की भूमिका संभालेंगी।

पार्क स्ट्रीट कांड और ममता बनर्जी का वह मनगढ़ंत दावा कहानी की जड़ 6 फरवरी 2012 की उस रात में है, जब कोलकाता के पार्क स्ट्रीट में एक महिला का सामूहिक बलात्कार हुआ। टीएमसी सरकार के शुरुआती दिनों में हुई इस घटना को तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सिरे से खारिज करते हुए इसे सजानो घोटोना यानी एक मनगढ़ंत कहानी करार दिया था। इस बयान ने राज्य की पुलिस और जांच अधिकारियों पर भारी दबाव बनाया था।

सच की कीमत: लालबाजार से साइड पोस्टिंग तब कोलकाता पुलिस की संयुक्त आयुक्त (क्राइम) रहीं दामयंती सेन ने राजनीतिक दबाव की परवाह नहीं की। उन्होंने पेशेवर ईमानदारी दिखाते हुए कुछ ही दिनों में अपराधियों को गिरफ्तार कर सबूत पेश किए और साबित किया कि यह घटना कोई साजिश नहीं, बल्कि एक खौफनाक सच्चाई थी। सच बोलने की सजा उन्हें तुरंत मिली—उन्हें लालबाजार (मुख्यालय) से हटाकर बैरकपुर की एक कम महत्वपूर्ण पोस्ट पर भेज दिया गया। पिछले 14 वर्षों तक उन्हें किसी भी बड़ी जांच से दूर रखा गया।

सुवेंदु सरकार का मास्टरस्ट्रोक अब नई सरकार ने दामयंती सेन की काबिलियत को पहचानते हुए उन्हें रिटायर्ड जस्टिस समाप्ती चटर्जी की अध्यक्षता वाली विशेष समिति में शामिल किया है। यह समिति पुलिस थानों में महिलाओं और बच्चों की शिकायतों पर सीधा एक्शन लेगी। 1 जून से अपना कामकाज शुरू करने वाली इस समिति के लिए सेन ने अभी से युद्ध स्तर पर डेटा जुटाना शुरू कर दिया है।

साफ संदेश: अब सच का होगा सम्मान राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सुवेंदु अधिकारी का यह कदम सिर्फ महिलाओं की सुरक्षा के लिए नहीं, बल्कि एक कड़ा राजनीतिक संदेश भी है। इस नियुक्ति ने स्पष्ट कर दिया है कि नई सरकार में उन अधिकारियों को प्राथमिकता दी जाएगी जो राजनीतिक दबाव से ऊपर उठकर सच का साथ देने का साहस रखते हैं।

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