नॉर्डिक देशों पर भारत का बढ़ा दबदबा: स्वीडन की बड़ी जीत के बाद अब ओस्लो के मिशन पर PM मोदी
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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वीडन की अपनी सफल यात्रा का समापन कर दिया है। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक पहुँचाकर एक नया इतिहास रचा है। अब प्रधानमंत्री अपनी नॉर्डिक यात्रा के अगले पड़ाव, नॉर्वे के लिए रवाना हो चुके हैं। यह 43 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की नॉर्वे की पहली यात्रा है।

स्वीडन में ऐतिहासिक कूटनीतिक सफलता

स्वीडन में प्रधानमंत्री मोदी की वार्ता बेहद फलदायी रही। दोनों देशों ने संयुक्त नवाचार साझेदारी (Joint Innovation Partnership) 2.0 और भारत-स्वीडन प्रौद्योगिकी तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कॉरिडोर शुरू करने का निर्णय लिया है। इसके अलावा, अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है।

अपनी उपलब्धियों के चलते प्रधानमंत्री मोदी को स्वीडन के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक रॉयल ऑर्डर ऑफ द पोलर स्टार, डिग्री कमांडर ग्रैंड क्रॉस से नवाजा गया। यह सम्मान भारत-स्वीडन संबंधों में उनके दूरदर्शी नेतृत्व का प्रतीक है।

सुधार एक्सप्रेस और वैश्विक निवेशकों को संदेश

यूरोपीय राउंड टेबल ऑफ इंडस्ट्रियलिस्ट्स को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि भारत की सुधार एक्सप्रेस पूरी रफ्तार से चल रही है। उन्होंने सुधार, प्रदर्शन और परिवर्तन के मंत्र को दोहराते हुए कहा कि भारत की युवा शक्ति और बढ़ता मध्यम वर्ग वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा अवसर है। उन्होंने स्वीडन की स्थिरता और नवाचार को भारत की गति के साथ जोड़ने का आह्वान किया।

नॉर्वे में भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन

अपनी यात्रा के अगले चरण में, प्रधानमंत्री मंगलवार को ओस्लो में तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इस महत्वपूर्ण बैठक में नॉर्वे, डेनमार्क, फिनलैंड, आइसलैंड और स्वीडन के शीर्ष नेतृत्व के साथ चर्चा होगी।

ओस्लो में प्रधानमंत्री मोदी नॉर्वे के किंग हेराल्ड पंचम और क्वीन सोनजा से मुलाकात करेंगे। इसके साथ ही, वे नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे और भारत-नॉर्वे व्यापार और अनुसंधान शिखर-सम्मेलन को भी संबोधित करेंगे।

आर्थिक एजेंडा पर खास नजर

भारत और नॉर्वे के बीच व्यापारिक संबंधों में नई जान फूंकना इस दौरे का मुख्य लक्ष्य है। साल 2024 में दोनों देशों के बीच लगभग 2.73 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार हुआ था। कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि मोदी की यह यात्रा न केवल व्यापार को बढ़ावा देगी, बल्कि रक्षा, प्रौद्योगिकी और सतत विकास के क्षेत्र में भी नए द्वार खोलेगी।

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