भोजशाला पर ऐतिहासिक फैसला: कई पीढ़ियों की तपस्या हुई सफल , भावुक हुए आंदोलनकारी
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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का भोजशाला पर आया फैसला हिंदू समाज के लिए एक बड़ी जीत के रूप में सामने आया है। दशकों के लंबे संघर्ष और कानूनी लड़ाई के बाद वाग्देवी मंदिर में नियमित पूजा-अर्चना का मार्ग प्रशस्त हुआ है। इस फैसले के बाद धार में खुशी और भावुकता का माहौल है।

जवानी खपा दी, अपनों को खोया आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि यह संघर्ष केवल कानून तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें कई पीढ़ियों का बलिदान शामिल है। आंदोलनकारियों ने भावुक होते हुए कहा कि भोजशाला को वापस पाने के लिए कई लोगों ने अपनी जवानी कुर्बान कर दी और कई ने आंदोलन के दौरान अपने प्राण तक गंवा दिए।

इतिहास गवाह है, हर पत्थर मंदिर का प्रमाण भोज उत्सव समिति के सदस्यों और स्थानीय नेताओं का मानना है कि भोजशाला के हर पत्थर पर मंदिर होने के पुख्ता प्रमाण हैं। हिंदू नेता अशोक जैन ने स्पष्ट कहा कि वर्षों से जारी इस लड़ाई के दौरान हिंदू समाज ने हर प्रतिकूल परिस्थिति का सामना किया। उन्होंने कहा, जब सरकारों ने हमारी अनदेखी की, तब भी हम पीछे नहीं हटे और धर्म की यह लड़ाई जारी रखी।

लंदन से वाग्देवी की प्रतिमा वापस लाने का इंतजार राजेश शुक्ला ने कहा कि आज का दिन सदियों के संघर्ष का परिणाम है। हालांकि अभी प्रतीकात्मक पूजा की जा रही है, लेकिन पूरा हिंदू समाज उस दिन का बेसब्री से इंतजार कर रहा है, जब लंदन स्थित मां वाग्देवी की मूल प्रतिमा वापस अपने स्थान पर प्रतिष्ठित होगी।

अंतिम लक्ष्य तक जारी रहेगा संघर्ष 90 वर्षीय वरिष्ठ नेता विमल गोधा ने याद दिलाया कि इस आंदोलन के लिए कई पीढ़ियों ने लाठियां खाईं और संघर्ष किया। उन्होंने दलील दी कि यह जीत एक पड़ाव है, लेकिन पूर्ण अधिकार मिलने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

सत्याग्रह का सिलसिला रहेगा जारी आंदोलन के सक्रिय कार्यकर्ता गोपाल शर्मा ने बताया कि उन्होंने कभी इस मुद्दे पर राजनीति नहीं की, बल्कि यह पूरी तरह धर्म की लड़ाई थी। वसंत पंचमी पर मिली पहली जीत के बाद अब भी आंदोलनकारियों का संकल्प अडिग है। मंगलवार को भोजशाला में सत्याग्रह का क्रम जारी रहेगा, ताकि मंदिर का स्वरूप पूरी तरह बहाल हो सके।

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