परीक्षा का दबाव या व्यवस्था की नाकामी? सिद्धार्थ हेगड़े आत्महत्या मामले में केजरीवाल की सरकार से तीखी सवाल
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गोवा में मातम: एक होनहार छात्र की जीवन यात्रा थमी गोवा के नेसाई इलाके में 17 वर्षीय सिद्धार्थ हेगड़े की आत्महत्या ने देश भर में हड़कंप मचा दिया है। 12वीं साइंस का छात्र सिद्धार्थ मेडिकल प्रवेश परीक्षा (NEET UG 2026) की तैयारी कर रहा था। मंगलवार रात जब उसने अपने कमरे में खुद को खत्म किया, तो अपने पीछे उन तमाम सवालों को छोड़ गया जो आज भारत की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर चोट कर रहे हैं।

सुसाइड नोट में छलका संघर्ष पुलिस को मौके से एक सुसाइड नोट मिला है। इसमें सिद्धार्थ ने साफ लिखा है कि वह पिछले दो साल से भारी मानसिक दबाव में था। वह न केवल मेडिकल की पढ़ाई कर रहा था, बल्कि हॉकी का भी अच्छा खिलाड़ी था। पढ़ाई और खेल के बीच संतुलन बनाना और ऊपर से लगातार बदलती परीक्षा व्यवस्था के तनाव ने उसे अंदर से तोड़ दिया था। उसने नोट में लिखा कि अब वह किसी और प्रतियोगी परीक्षा का बोझ नहीं उठा सकता।

अरविंद केजरीवाल का तीखा प्रहार घटना की गंभीरता को देखते हुए आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल सिद्धार्थ के परिवार से मिलने उनके घर पहुंचे। केजरीवाल ने इस घटना को एक व्यवस्थागत हत्या करार दिया। उन्होंने कहा, 17 साल का बच्चा देश का भविष्य होता है। जिस तरह से पेपर लीक और परीक्षाओं के रद्द होने से छात्रों पर मानसिक बोझ डाला जा रहा है, उसके लिए जिम्मेदार कौन है? उन्होंने सीधे तौर पर सिस्टम के उन जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है जो छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।

अस्पताल पहुंचने से पहले ही थम गईं सांसें घटना मंगलवार रात करीब 11:15 बजे की है। जब सिद्धार्थ ने कमरा नहीं खोला, तो परिवार ने पड़ोसी की मदद से दरवाजा तोड़ा। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। हालांकि पुलिस का कहना है कि मौत को सीधे NEET परीक्षा रद्द होने से जोड़ना जल्दबाजी होगी, लेकिन यह स्पष्ट है कि परीक्षा व्यवस्था में अनिश्चितता ने इस छात्र के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाला था।

देशभर में उठी आवाजें NEET UG 2026 के रद्द होने के बाद से ही छात्र पहले से डरे हुए हैं। सोशल मीडिया पर छात्रों का आक्रोश फूट पड़ा है। वे लगातार पेपर लीक और बार-बार बदलती परीक्षाओं को मानसिक प्रताड़ना बता रहे हैं। सिद्धार्थ की मौत ने इस बहस को और तेज कर दिया है कि क्या हमारा शिक्षा तंत्र छात्रों को डॉक्टर और इंजीनियर बनाने के नाम पर मशीन और तनाव का शिकार तो नहीं बना रहा?

यह दुखद घटना उन माता-पिता और नीति निर्माताओं के लिए एक चेतावनी है, जो परीक्षा के परिणामों को बच्चों की जिंदगी से बड़ा मानने की गलती करते हैं।

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