ब्रिक्स मंच से भारत की दहाड़: आतंकवाद और प्रतिबंधों पर दो टूक, वैश्विक शक्तियों को कड़ा संदेश
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ब्रिक्स (BRICS) विदेश मंत्रियों की बैठक में भारत ने वैश्विक मंच पर अपनी मुखर नीति का परिचय दिया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर की अगुवाई में भारत ने आतंकवाद, एकतरफा प्रतिबंधों और समुद्री सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर बेहद सख्त रुख अपनाया है। भारत का यह संदेश न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक कूटनीति के पटल पर एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि आतंकवाद के लिए कोई स्थान नहीं है। बैठक में भारत ने कहा कि सीमा पार आतंकवाद अंतरराष्ट्रीय संबंधों के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन है और यह वैश्विक शांति के लिए सबसे बड़ा खतरा है। भारत ने जोर देकर कहा कि आतंकवाद को किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता और पूरी दुनिया को इसके खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनानी होगी।

एकतरफा प्रतिबंधों की आलोचना भारत ने उन एकतरफा प्रतिबंधों और दबाव की राजनीति पर तीखा हमला बोला जो संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुरूप नहीं हैं। भारत का मानना है कि ऐसे कदम विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था पर गहरा नकारात्मक असर डालते हैं। भारत ने दो टूक शब्दों में कहा कि दबाव की राजनीति कभी भी कूटनीति और संवाद का स्थान नहीं ले सकती।

होर्मुज स्ट्रेट और समुद्री सुरक्षा की चिंता पश्चिम एशिया में बिगड़ते हालातों पर भारत ने गहरी चिंता जताई है। भारत ने होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर में बढ़ते खतरों को वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा के लिए बड़ा जोखिम बताया है। भारत का कहना है कि समुद्री मार्गों में निर्बाध आवाजाही वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए अनिवार्य है और ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर में कोई भी व्यवधान दुनिया भर में ऊर्जा संकट पैदा कर सकता है।

संयुक्त राष्ट्र में सुधार की मांग भारत ने एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र (UN) और वैश्विक बहुपक्षीय संस्थाओं में तत्काल सुधार की वकालत की है। भारत ने तर्क दिया कि मौजूदा वैश्विक चुनौतियों के बीच संयुक्त राष्ट्र की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं। सुरक्षा परिषद में स्थायी और अस्थायी श्रेणियों में व्यापक सुधार न होना एक गंभीर चूक है, जिसकी कीमत पूरी दुनिया को चुकानी पड़ रही है।

वैश्विक दक्षिण की आवाज बना भारत ब्रिक्स की इस बैठक में भारत का रुख वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज को मजबूती देने वाला रहा। आतंकवाद से लेकर ऊर्जा सुरक्षा तक, भारत ने जिस तरह से संतुलित और दृढ़ दृष्टिकोण रखा है, उससे साफ है कि नई दिल्ली अब अंतरराष्ट्रीय विवादों के समाधान में केवल एक दर्शक नहीं, बल्कि एक निर्णायक मध्यस्थ की भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

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