CBSE 12वीं रिजल्ट: 6 साल में सबसे खराब प्रदर्शन, क्या नई डिजिटल मार्किंग बनी छात्रों की मुसीबत?
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केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने 12वीं कक्षा के नतीजे जारी कर दिए हैं, लेकिन इस बार के आंकड़े शिक्षा जगत में हलचल मचा रहे हैं। 18.57 लाख से अधिक छात्रों में से 85.20% छात्र ही सफल हो पाए हैं। यह पिछले छह वर्षों में बोर्ड का सबसे निचला पास प्रतिशत है।

बेटियों ने फिर मारी बाजी इस साल 18,57,517 छात्रों ने पंजीकरण कराया था, जिनमें से 17,68,968 ने परीक्षा उत्तीर्ण की। आंकड़ों पर गौर करें तो छात्राओं का प्रदर्शन छात्रों के मुकाबले बेहतर रहा। जहां लड़कियों का पास प्रतिशत 88.86% रहा, वहीं लड़के 82.13% के साथ पीछे रहे।

क्या नई मार्किंग स्कीम है जिम्मेदार? रिजल्ट में आई इस बड़ी गिरावट के पीछे सबसे ज्यादा चर्चा ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम की हो रही है। पहली बार बड़े स्तर पर लागू इस डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली में स्कैन की गई कॉपियों को ऑनलाइन जांचा गया। विशेषज्ञों का मानना है कि इस सिस्टम ने स्टेप-मार्किंग के बजाय सीधे उत्तर की गुणवत्ता पर ध्यान केंद्रित किया, जिससे रटकर पढ़ने वाले छात्रों को नुकसान उठाना पड़ा।

पिछले 6 सालों का हाल

कठिन प्रश्नपत्र और प्रतियोगी दबाव विशेषज्ञों के अनुसार, इस साल के प्रश्नपत्र अधिक विश्लेषणात्मक (analytical) और कॉन्सेप्ट-आधारित थे। भौतिक विज्ञान (Physics) और गणित जैसे विषयों को छात्रों ने काफी चुनौतीपूर्ण बताया। इसके अलावा, JEE और NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के बढ़ते दबाव के कारण छात्रों का ध्यान बंटा, जिसका सीधा असर बोर्ड के अंकों पर दिखा।

सोशल मीडिया पर छात्रों का आक्रोश परिणाम जारी होते ही सोशल मीडिया पर छात्रों की नाराजगी स्पष्ट दिखी। कई होनहार छात्रों ने दावा किया कि JEE जैसी कठिन परीक्षाओं में बेहतरीन प्रदर्शन के बावजूद उन्हें बोर्ड की थ्योरी परीक्षा में बहुत कम अंक मिले हैं। छात्रों ने OSM सिस्टम में तकनीकी खामियों और मूल्यांकन में पारदर्शिता की कमी का मुद्दा उठाया है।

क्या है ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM)? यह एक डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया है, जिसमें उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन करके कंप्यूटर स्क्रीन पर परीक्षकों को दिखाया जाता है। हालांकि बोर्ड का दावा है कि यह प्रक्रिया अधिक निष्पक्ष और पारदर्शी है, लेकिन छात्रों के बीच इसे लेकर डर और असमंजस बरकरार है।

निष्कर्ष शिक्षाविदों का मानना है कि सख्त मूल्यांकन का उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारना है, लेकिन वर्तमान परिणाम ने नए परीक्षा पैटर्न और मार्किंग सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बोर्ड की ओर से अभी तक किसी तकनीकी गड़बड़ी की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन छात्रों की मांग है कि मूल्यांकन प्रणाली की फिर से समीक्षा की जाए।

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