बरगी बांध क्रूज हादसा: कागजों में पहले ही मौत का फरमान, सीज इंजनों के भरोसे चल रही थी सवारियों की जान
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जबलपुर के बरगी बांध में हुए क्रूज हादसे ने अब एक नए और गंभीर विवाद को जन्म दे दिया है। एक आधिकारिक पत्र से यह खुलासा हुआ है कि हादसा महज एक दुर्घटना नहीं, बल्कि एक पूर्व-सूचित लापरवाही थी। क्रूज के दोनों इंजन काफी पहले ही पूरी तरह सीज हो चुके थे, लेकिन फिर भी उन्हें असुरक्षित तरीके से संचालित किया जा रहा था।

दस्तावेजों में दफन थी चेतावनी 1 मार्च 2026 को मैकल रिसॉर्ट, बरगी द्वारा क्षेत्रीय प्रबंधक, मप्र राज्य पर्यटन विकास निगम को एक औपचारिक पत्र भेजा गया था। इस पत्र में क्रूज की जर्जर स्थिति का काला चिट्ठा खोलकर रख दिया गया था। अधिकारियों को साफ बता दिया गया था कि अब इन इंजनों के सुधार की कोई गुंजाइश नहीं बची है और इन्हें तुरंत बदला जाना अनिवार्य है।

19-20 साल पुराने हो चुके थे क्रूज पत्र के मुताबिक, बरगी बांध में संचालित मैकल सुता क्रूज 20 साल और रेवा क्रूज 19 साल पुराना था। इन दोनों क्रूज की उम्र पूरी हो चुकी थी और इनके इंजन लगातार जवाब दे रहे थे। 14 जनवरी 2025 को ही रेवा क्रूज के दोनों इंजन बीच सफर में सीज हो गए थे। उस समय हैदराबाद के बोट डीलर ने स्पष्ट सलाह दी थी कि इंजन के स्पेयर पार्ट्स भी अब उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए इन्हें तुरंत बदलना ही एकमात्र विकल्प है।

जान जोखिम में डालकर जारी था संचालन अधिकारियों को चेतावनी दी गई थी कि मैकल सुता क्रूज का एक इंजन लोड नहीं ले पा रहा है, जिसके चलते उसे किनारे लगाने में भी पसीना छूट जाता है। तेज हवाओं या लहरों के बीच क्रूज को नियंत्रित करना मुश्किल हो रहा था। कई बार स्पीड बोट की मदद लेनी पड़ती थी। बावजूद इसके, पर्यटन सीजन की कमाई के लालच में इन खटारा हो चुके क्रूज का संचालन जारी रखा गया।

सालों से की जा रही थी अनदेखी इस हादसे की नींव महीनों पहले ही पड़ गई थी। पत्र में 2025 के दौरान भेजे गए तीन अन्य पत्रों (दिनांक 16 अप्रैल, 11 अगस्त और 17 नवंबर) का भी जिक्र है। यानी, प्रबंधन को बार-बार आगाह किया गया था कि इंजन किसी भी दिन दगा दे सकते हैं और संचालन बंद होने की नौबत आ सकती है।

13 जिंदगियां और सवालिया निशान 30 अप्रैल 2026 को जब यह क्रूज हादसे का शिकार हुआ, तब उस पर 29 लोग सवार थे। इस हादसे में 13 पर्यटकों ने अपनी जान गंवा दी। अब सवाल यह उठता है कि क्या पर्यटन निगम ने कमाई के आगे सुरक्षा को पूरी तरह ताक पर रख दिया था? क्या इन चेतावनियों के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई? यह खुलासा प्रशासनिक लापरवाही के उस भयावह सच को सामने लाता है, जिसने 13 हंसते-खेलते परिवारों की खुशियां छीन लीं।

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