नाटो जैसा मिलिट्री ब्लॉक: तुर्की-कतर के जुड़ने से पाकिस्तान-सऊदी गठबंधन हुआ और घातक, क्या है भारत के लिए खतरा?
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इस्लामाबाद: पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच रक्षा संबंधों में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने बड़ा ऐलान करते हुए बताया है कि तुर्की और कतर भी जल्द ही उनके स्ट्रैटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट (SMDA) में शामिल हो सकते हैं। यह गठबंधन नाटो (NATO) के चर्चित आर्टिकल 5 की तर्ज पर काम करेगा।

क्या है यह आर्टिकल 5 जैसा समझौता? पिछले साल सितंबर में पाकिस्तान और सऊदी अरब ने एक ऐतिहासिक रक्षा समझौता किया था। इसके तहत, यदि किसी एक देश पर बाहरी हमला होता है, तो उसे दूसरे देश पर भी हमला माना जाएगा। यानी दोनों देश मिलकर इसका जवाब देंगे। इसमें संयुक्त सैन्य तंत्र, खुफिया जानकारी साझा करना और रक्षा उपकरणों का आदान-प्रदान शामिल है। हालांकि, पाकिस्तान ने स्पष्ट किया है कि इसमें सऊदी अरब के लिए कोई परमाणु छतरी शामिल नहीं है।

तुर्की और कतर की एंट्री से बढ़ेगी ताकत सऊदी अरब और कतर ऊर्जा के वैश्विक पावरहाउस हैं, जबकि तुर्की का रक्षा उद्योग, विशेषकर ड्रोन तकनीक, दुनिया भर में अपनी पहचान बना चुका है। यदि ये देश इस गठबंधन में शामिल होते हैं, तो पाकिस्तान की सैन्य क्षमता में भारी इजाफा होगा। पाकिस्तान को तुर्की के आधुनिक ड्रोन और अन्य घातक हथियार अधिक आसानी से उपलब्ध हो सकेंगे।

भारत को क्यों है चिंता? भारत के लिए यह गठबंधन कूटनीतिक और सुरक्षा दोनों मोर्चों पर चुनौतियां खड़ी कर सकता है:

कूटनीति की जटिलता: भारत कैसे संभालेगा रिश्ते? भारत के लिए यह स्थिति बेहद नाजुक है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए सऊदी अरब और कतर पर काफी हद तक निर्भर है। वहीं, सऊदी अरब के लिए भारत एक विशाल व्यापारिक बाजार है। क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के भारत के साथ गहरे व्यापारिक संबंध हैं, जिसे वे पाकिस्तान के लिए दांव पर लगाने से बचेंगे।

जानकारों का मानना है कि सऊदी अरब का यह कदम मुख्य रूप से ईरान के प्रभाव को संतुलित करने के लिए है, न कि सीधे भारत को घेरने के लिए। लेकिन पाकिस्तान इस गठबंधन का इस्तेमाल भारत के खिलाफ कूटनीतिक मोर्चे पर माहौल बनाने के लिए जरूर करेगा। भारत को आने वाले समय में खाड़ी देशों के साथ अपने संबंधों को बहुत ही संवेदनशीलता और चतुराई के साथ आगे बढ़ाना होगा।

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