लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के नए निदेशक के चयन को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने चयन प्रक्रिया को पक्षपातपूर्ण बताते हुए अपनी कड़ी असहमति जताई है।
संवैधानिक कर्तव्य से समझौता नहीं राहुल गांधी ने स्पष्ट किया है कि वह ऐसी चयन प्रक्रिया का हिस्सा बनकर अपने संवैधानिक दायित्वों से मुंह नहीं मोड़ सकते, जिसे उन्होंने एक मजाक करार दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि नेता प्रतिपक्ष का पद कोई रबर स्टाम्प नहीं है, जिसका उपयोग केवल औपचारिकता पूरी करने के लिए किया जाए।
विपक्ष का संस्थागत कब्जे पर प्रहार पत्र में राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार राजनीतिक विरोधियों, पत्रकारों और आलोचकों को निशाना बनाने के लिए सीबीआई का दुरुपयोग कर रही है। उन्होंने कहा कि चयन समिति में नेता प्रतिपक्ष को शामिल करने का मुख्य उद्देश्य ही इस प्रकार के संस्थागत कब्जे को रोकना है, लेकिन सरकार उन्हें लगातार किसी भी सार्थक भूमिका से वंचित रख रही है।
असेसमेंट रिकॉर्ड देने से इंकार विवाद का मुख्य कारण उम्मीदवारों का 360-डिग्री असेसमेंट रिकॉर्ड न मिलना है। राहुल गांधी का कहना है कि बार-बार अनुरोध करने के बावजूद उन्हें यह रिपोर्ट नहीं दी गई। उनसे उम्मीद की गई कि वे बैठक के दौरान ही इन फाइलों को पढ़ें, जो किसी भी गंभीर मूल्यांकन के लिए अपर्याप्त है।
पहले से तय है उम्मीदवार कांग्रेस नेता ने दावा किया कि जानबूझकर जानकारी छिपाना यह साबित करता है कि सरकार ने पहले से ही अपना उम्मीदवार तय कर रखा है। चयन समिति की कार्यवाही को केवल एक दिखावा बताते हुए उन्होंने कहा कि बिना पारदर्शी प्रक्रिया के किसी ईमानदार चयन की उम्मीद नहीं की जा सकती।
लंबे समय से अनसुनी मांगें राहुल गांधी ने अपने पत्र में 5 मई 2025 और 21 अक्टूबर 2025 की बैठकों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष प्रक्रिया के लिए दिए गए उनके सुझावों का आज तक कोई जवाब नहीं दिया गया है। अंत में उन्होंने दोहराया कि वह इस पक्षपातपूर्ण प्रक्रिया में भाग लेकर इस धांधली में अपनी मूक सहमति नहीं देंगे।
I have written to the Prime Minister recording my dissent from the CBI Director selection process.
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) May 12, 2026
I cannot abdicate my constitutional duty by participating in a biased exercise.
The Leader of Opposition is not a rubber stamp. pic.twitter.com/WfSt5gGPPR
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