पीएम मोदी की बचत अपील पर सियासत गरमाई, पेट्रोलियम मंत्रालय ने दी सफाई
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हाल ही में की गई बचत की अपील के बाद देश में राजनीतिक घमासान मच गया है। तेलंगाना दौरे के दौरान पीएम ने लोगों से सोना न खरीदने, विदेशी मुद्रा बचाने और तेल की खपत कम करने का आग्रह किया था। इस बयान के बाद उपजे सवालों के बीच सरकार ने स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की है।

ईंधन की कमी की खबरों का खंडन

पेट्रोलियम मंत्रालय ने सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर देश में ईंधन की स्थिति स्पष्ट की। मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा ने कहा कि देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि रिफाइनरियां अपनी पूरी क्षमता से काम कर रही हैं और किसी भी रिटेल आउटलेट पर ईंधन खत्म होने की कोई रिपोर्ट नहीं है।

आंकड़ों के अनुसार, पिछले तीन दिनों में 1.14 करोड़ एलपीजी सिलेंडर डिलीवर किए गए हैं और कमर्शियल एलपीजी की बिक्री भी सुचारू रूप से जारी है।

मध्य-पूर्व संकट पर अंतर-मंत्रालयी बैठक

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में सोमवार को इंटर-मिनिस्ट्रियल ग्रुप (IGoM) की बैठक हुई। बैठक में यह साफ़ किया गया कि भारत के पास कच्चे तेल का 60 दिन का और एलपीजी का 45 दिन का बैकअप स्टॉक मौजूद है। सरकार ने स्पष्ट किया कि पीएम की अपील को ईंधन की कमी से न जोड़ा जाए, बल्कि इसे वैश्विक अनिश्चितता के दौर में ऊर्जा संरक्षण और आत्मनिर्भरता के प्रति जागरूकता के रूप में देखा जाना चाहिए।

विपक्ष का जोरदार हमला

पीएम मोदी की अपील को विपक्ष ने सरकार की विफलता करार दिया है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल और राहुल गांधी ने इसे नाकामी का सबूत बताया। राहुल गांधी ने कहा, मोदी जी जिम्मेदारी जनता पर डाल रहे हैं ताकि खुद जवाबदेही से बच सकें।

वहीं, आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल ने इसे आर्थिक इमरजेंसी की आहट बताते हुए सरकार से अर्थव्यवस्था की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। अखिलेश यादव ने भी इसे व्यापारिक मंदी और घबराहट फैलाने वाला कदम बताया।

बाजार पर दिखा असर

प्रधानमंत्री के इस बयान का असर शेयर बाजार पर भी दिखा। सोमवार को बाजार खुलते ही ज्वैलरी सेक्टर के शेयरों में जोरदार गिरावट दर्ज की गई। स्काई गोल्ड और सेनको जैसी कंपनियों के शेयरों में 7 से 12 प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई।

सरकार का कहना है कि वे वैश्विक संघर्ष के बावजूद कीमतों को स्थिर रखने का पूरा प्रयास कर रहे हैं और तेल कंपनियां खुद नुकसान उठाकर आम जनता पर बोझ कम कर रही हैं। फिलहाल, सरकार का जोर आम लोगों से सार्वजनिक परिवहन अपनाने और ऊर्जा बचत में सहयोग करने पर है।

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