कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को मिली करारी हार के बाद पार्टी के भीतर का असंतोष सड़कों पर आ गया है। हार के बाद से ही पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता खुलकर पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं।
कॉरपोरेट स्टाइल बनाम जमीनी राजनीति पार्टी के भीतर से उठ रही सबसे बड़ी आवाज अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली को लेकर है। मालदा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री कृष्णेंदु नारायण चौधरी ने सीधा आरोप लगाया कि अभिषेक ने पार्टी को एक कॉरपोरेट हाउस की तरह चलाया, जो बंगाल की जमीनी राजनीति के अनुकूल नहीं है। उन्होंने तो यहाँ तक कह डाला कि अभिषेक बनर्जी ने धीरे-धीरे पार्टी को खत्म कर दिया है।
कई अन्य नेताओं का मानना है कि आधुनिक तकनीक और डेटा के भरोसे रहने वाली अभिषेक की रणनीति ने पार्टी को जनमानस से दूर कर दिया। वरिष्ठ नेता अतिन घोष ने कहा कि तकनीक लोगों की नब्ज नहीं समझ सकती, जिसके लिए जमीनी नेतृत्व की जरूरत होती है।
आई-पैक की भूमिका पर उठे सवाल टीएमसी नेताओं के गुस्से का एक बड़ा केंद्र चुनाव प्रबंधन करने वाली कंसल्टेंसी फर्म आई-पैक (I-PAC) है। पूर्व विधायक खगेश्वर रॉय ने हार के लिए 98 फीसदी जिम्मेदारी आई-पैक को ठहराते हुए कहा कि पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर आई-पैक के कर्मचारी पूरी तरह हावी हो गए थे।
आरोप है कि ये कर्मचारी शाही अंदाज में रहते थे और एसी गाड़ियों में घूमते थे, जिससे वे आम जनता से जुड़ने में नाकाम रहे। राज्यसभा सांसद रहे जवाहर सरकार ने भी पहले आगाह किया था कि आई-पैक जैसी तीसरी ताकत के प्रभाव से पार्टी में कॉरपोरेट संस्कृति पनप रही है, जो लोकतंत्र के लिए घातक है।
टिकट बंटवारे में भ्रष्टाचार और इस्तीफों का दौर पार्टी के भीतर से पैसे लेकर टिकट देने के गंभीर आरोप भी लग रहे हैं। कई पूर्व विधायकों ने दावा किया कि जो आई-पैक को पैसे नहीं दे सके, उन्हें चुनाव लड़ने का मौका नहीं दिया गया। चुनाव से पहले 74 विधायकों के टिकट काटे जाने के फैसले को इसी के साथ जोड़कर देखा जा रहा है।
असंतोष का आलम यह है कि हार के बाद कई दिग्गज नेताओं ने राजनीति से दूरी बनाने का ऐलान कर दिया है। खेल विभाग के पूर्व राज्य मंत्री मनोज तिवारी ने पार्टी नेतृत्व पर काम करने की जगह न देने का आरोप लगाया, वहीं राज चक्रवर्ती जैसे फिल्म हस्तियों ने राजनीति से संन्यास की घोषणा कर दी है।
अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी पार्टी में मचे इस घमासान को रोकने के लिए टीएमसी नेतृत्व ने सख्त रुख अपनाया है। पार्टी ने कृष्णेंदु नारायण चौधरी, रिजू दत्ता और पापिया घोष समेत कई नेताओं और प्रवक्ताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। टीएमसी का स्पष्ट कहना है कि वह इन बयानों का समर्थन नहीं करती और पार्टी विरोधी गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
*I am quitting as MP primarily because of WB government’s faulty handling of the most spontaneous public movement following the terrible rape-murder case at RG Kar Hospital.
— Jawhar Sircar (@jawharsircar) September 8, 2024
Quitting politics— to be with the people in their struggle for justice.
My commitment to values unchanged pic.twitter.com/V98R06ziny
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