तमिलनाडु में चल रही सियासी उथल-पुथल ने आज देश की राजनीति को लगभग तीन दशक पीछे ले जाकर खड़ा कर दिया है। राज्य में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी TVK के बहुमत के लिए जूझने और छोटी पार्टियों के हाथों में सत्ता की चाबी होने के बीच, भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता रहे स्व. प्रमोद महाजन का 1997 का एक पुराना संसदीय भाषण सोशल मीडिया पर फिर से वायरल हो गया है।
तमिलनाडु का गणित और मौजूदा संकट राज्य की 234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए 118 सीटें अनिवार्य हैं। TVK ने 108 सीटों पर जीत दर्ज की है, लेकिन सरकार बनाने के लिए उसे अभी भी जादुई आंकड़े का इंतजार है। कांग्रेस, वामपंथी दल और अन्य छोटे गुटों के समर्थन पर सस्पेंस बना हुआ है। गठबंधन की इसी पेचीदगी ने 1996-97 के उस दौर की याद ताजा कर दी, जब देश त्रिशंकु जनादेश से जूझ रहा था।
क्या था प्रमोद महाजन का वो व्यंग्य? 11 अप्रैल 1997 को देवेगौड़ा सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर बोलते हुए महाजन ने भारतीय राजनीति की विसंगतियों को बेहद धारदार अंदाज में पेश किया था। उन्होंने कहा था:
गठबंधन की शादी और देवेगौड़ा पर तंज महाजन ने उस समय की कांग्रेस-संयुक्त मोर्चा गठबंधन की तुलना एक ऐसी शादी से की थी, जहाँ दूल्हा और दुल्हन के पिता पहले दिन से ही एक-दूसरे के दुश्मन थे। उन्होंने तत्कालीन पीएम देवेगौड़ा के सार्वजनिक कार्यक्रमों में झपकी लेने पर भी चुटकी ली थी, जिसे आज के दौर की राजनीतिक अनिश्चितता के साथ जोड़कर देखा जा रहा है।
इतिहास खुद को दोहरा रहा है? महाजन ने कहा था कि बाहरी समर्थन ऐसा है, जैसे कोई आपकी सीढ़ी पकड़े और आखिरी पायदान पर पहुंचते ही उसे खींच ले। आज तमिलनाडु में भी ठीक वैसा ही नजारा है; वैचारिक विरोधों को दरकिनार कर सरकार बनाने की कवायद ने साबित कर दिया है कि सत्ता के खेल में संख्या का गणित सिद्धांतों पर भारी पड़ जाता है।
गठबंधन युग की वापसी 2014 के बाद देश में पूर्ण बहुमत की राजनीति का दौर शुरू हुआ था, लेकिन 2024 के बाद एक बार फिर सहयोगी दलों की अहमियत बढ़ गई है। तमिलनाडु का मौजूदा संकट महज एक राज्य की समस्या नहीं, बल्कि भारतीय राजनीति के उस पुराने गठबंधन युग की वापसी का संकेत है, जहाँ सबसे बड़ी पार्टी का होना ही सत्ता की गारंटी नहीं है। प्रमोद महाजन का वह भाषण आज भी उतना ही प्रासंगिक है, जितना 27 साल पहले था।
स्व. प्रमोद महाजन का 1997 में लोकसभा में दिया हुआ ये भाषण डेमोक्रेसी की गजब व्याख्या कर रहा है..
— Vivek K. Tripathi (@meevkt) May 8, 2026
सुनिए स्व. प्रमोद महाजन जी क्या कह रहे हैं..
किसी ने कहा, डेमोक्रेसी.. तो मैंने कहा, मैं डेमोक्रेसी बताता हूं.. मैं परिचय कराता हूं, सिर्फ मेरा उदाहरण समझ लो.. मैंने कहा, आई एम… pic.twitter.com/7I732Zwd4m
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