टीएमसी की अंदरूनी कलह और राजनीतिक हत्याओं का सच: बंगाल भाजपा अध्यक्ष का बड़ा खुलासा
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पश्चिम बंगाल में चुनावी सरगर्मियों के बीच राज्य की राजनीति गरमा गई है। हाल ही में मगराहाट और डायमंड हार्बर में हुए पुनर्मतदान के दौरान टीएमसी और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच हुई हिंसक झड़पों ने राज्य में कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

टीएमसी में पैसे के लिए मचा है घमासान बंगाल भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने हिंसा पर बड़ा बयान देते हुए टीएमसी के भीतर जारी कलह की जड़ बताई है। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता खुद अपनी ही पार्टी में सुरक्षित नहीं हैं। उनके अनुसार, टीएमसी के भीतर आपसी खींचतान का मुख्य कारण पैसा है, जिसे लेकर अक्सर हिंसक झड़पें होती हैं।

95% राजनीतिक हत्याओं में टीएमसी का हाथ? भट्टाचार्य ने एक चौंकाने वाला दावा करते हुए कहा कि पिछले तीन वर्षों में बंगाल में हुई 95% राजनीतिक हत्याओं में टीएमसी के ही कार्यकर्ता शामिल रहे हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि इन मामलों में पीड़ित पक्ष को अब राज्य पुलिस पर भरोसा नहीं रहा, इसलिए वे सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं। गौरतलब है कि इन पीड़ितों में से एक बड़ा हिस्सा अल्पसंख्यक समुदाय का है।

लोगों में आया निडरता का भाव पुनर्मतदान पर टिप्पणी करते हुए भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि अब बंगाल की जनता निडर हो चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कई वर्षों से लोगों को वोट डालने की अनुमति तक नहीं दी गई थी, लेकिन अब हालात बदल गए हैं। भट्टाचार्य ने दावा किया कि टीएमसी ने अपनी हार स्वीकार कर ली है।

धमकियों वाली राजनीति का अंत फाल्टा विधानसभा क्षेत्र में हुई झड़पों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि टीएमसी पिछले 10 सालों से मतदाताओं को डरा-धमका रही थी। लोगों को चेतावनी दी जाती थी कि अगर उन्होंने वोट नहीं दिया तो राशन और अन्य सरकारी सुविधाएं बंद कर दी जाएंगी। हालांकि, अब उन्होंने स्पष्ट किया कि टीएमसी सरकार सत्ता से बाहर होने की कगार पर है और जनता इस डर के तंत्र से बाहर निकल चुकी है।

इस मामले में पुलिस ने पहले ही टीएमसी समर्थकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है और कुछ गिरफ्तारियां भी हुई हैं। राज्य में जारी हिंसा और चुनावी घमासान पर अब सभी की निगाहें मतगणना के नतीजों पर टिकी हैं।

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