बंगाल की सत्ता का एग्जिट पोल और बांग्लादेश की संसद में मचा हड़कंप!
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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के एग्जिट पोल के नतीजे केवल भारत में ही नहीं, बल्कि पड़ोसी देश बांग्लादेश की संसद में भी चर्चा का विषय बन गए हैं। भाजपा की संभावित जीत की आहट ने बांग्लादेश के सियासी गलियारों में बेचैनी बढ़ा दी है।

बांग्लादेशी सांसद की चिंता का कारण बांग्लादेश के सांसद अख्तर हुसैन ने वहां की संसद में पश्चिम बंगाल के एग्जिट पोल पर गंभीर चिंता जताई है। हुसैन को डर है कि यदि बंगाल में भाजपा सत्ता में आती है, तो राज्य से अवैध घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें बाहर निकाला जाएगा।

उन्होंने इसे बांग्लादेश के लिए शरणार्थी संकट (Refugee Crisis) का बड़ा कारण बताया है। उनका यह बयान दर्शाता है कि भारतीय चुनावों के नतीजे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पड़ोसी देशों की स्थिरता को लेकर कितनी बड़ी चिंता पैदा कर रहे हैं।

भाजपा का रुख: घुसपैठ पर कड़ा प्रहार भारतीय जनता पार्टी ने इस पूरे चुनाव में घुसपैठ को मुख्य चुनावी मुद्दा बनाया है। पार्टी का स्पष्ट स्टैंड है कि बंगाल में अवैध रूप से रह रहे लोगों की पहचान की जाएगी और उन्हें वापस भेजा जाएगा।

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने बांग्लादेशी सांसद के बयान पर पलटवार करते हुए कहा है कि यह घबराहट इस बात का सबूत है कि टीएमसी के भारत विरोधी मददगार अब डरे हुए हैं। उन्होंने कहा कि बदलाव की बयार से घुसपैठियों के समर्थकों के चेहरे बेनकाब हो रहे हैं।

एग्जिट पोल के आंकड़े: क्या बदल रहा है बंगाल? टुडेज चाणक्य सहित कई प्रमुख एग्जिट पोल के आंकड़े संकेत दे रहे हैं कि पश्चिम बंगाल में भाजपा 192 से अधिक सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत की सरकार बना सकती है। वहीं, सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) 100 सीटों के आसपास सिमटती नजर आ रही है। इन आंकड़ों ने ही ढाका में बैठे नीति-निर्माताओं की नींद उड़ा दी है।

कौन है एनसीपी और क्या है एजेंडा? बांग्लादेश की नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP), जिसके नेता अख्तर हुसैन हैं, अपने कड़े भारत-विरोधी रुख के लिए पहचानी जाती है। इस पार्टी के तार जमात-ए-इस्लामी जैसे कट्टरपंथी संगठनों से जुड़े होने के आरोप लगते रहे हैं।

यह पार्टी पहले भी भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के खिलाफ उकसावे वाली बयानबाजी कर चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन बयानों का मकसद भारत में हो रहे लोकतांत्रिक बदलाव को सांप्रदायिक रंग देना है ताकि अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाया जा सके।

नतीजों का इंतजार 4 मई को आने वाले वास्तविक नतीजे न केवल बंगाल का भविष्य तय करेंगे, बल्कि भारत और बांग्लादेश के कूटनीतिक रिश्तों की अगली दिशा भी तय करेंगे। फिलहाल, एग्जिट पोल के ये आंकड़े सीमा के दोनों ओर बड़ी हलचल पैदा कर चुके हैं।

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