कौन हैं बड़ो मां जिनके सामने नतमस्तक हुए पीएम मोदी? बंगाल चुनाव में क्या है इसका सियासी संदेश
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कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के ठीक पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उत्तर 24 परगना के ठाकुरनगर दौरा सियासी गलियारों में चर्चा का केंद्र बन गया है। इस दौरान पीएम मोदी ने न केवल मतुआ समुदाय के सबसे बड़े धार्मिक स्थल मतुआ ठाकुर मंदिर में पूजा-अर्चना की, बल्कि मतुआ महासंघ की मुख्य संरक्षक रहीं बड़ो मां यानी स्व. वीणापाणि देवी के चित्र के सामने हाथ जोड़कर उन्हें नमन भी किया। यह तस्वीर अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है।

कौन हैं बड़ो मां वीणापाणि देवी?

मतुआ समुदाय के लिए बड़ो मां कोई सामान्य चेहरा नहीं, बल्कि एक दैवीय शक्ति और आध्यात्मिक जननी थीं। वीणापाणि देवी मतुआ महासंघ की मुख्य संरक्षक थीं। 2019 में उनके निधन के बाद भी समुदाय के बीच उनका प्रभाव और सम्मान अटूट है। पीएम मोदी ने मंदिर में उनके सामने नतमस्तक होकर समुदाय के साथ एक गहरा भावनात्मक जुड़ाव साधने की कोशिश की है।

सीएए और नागरिकता का मास्टरस्ट्रोक

ठाकुरनगर की पवित्र धरती से पीएम मोदी ने सीधे तौर पर मतुआ समुदाय को भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा, मैं संकल्प लेता हूं कि सीएए के जरिए मतुआ समाज के हर पात्र सदस्य को भारत की नागरिकता दी जाएगी। मतुआ नमशूद्र समुदाय बंगाल की करीब 40 से 50 विधानसभा सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाता है। ऐसे में मोदी का यह वादा सीधे उनके अस्तित्व और अधिकार की लड़ाई से जुड़ गया है।

टीएमसी बनाम बीजेपी: वादों और आरोपों की लड़ाई

प्रधानमंत्री ने ममता बनर्जी की सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने हमेशा शरणार्थियों को केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया। उन्होंने आरोप लगाया कि दीदी ने शरणार्थियों को डर के साये में रखा, जबकि बीजेपी उन्हें उनका जायज हक और सम्मान देने के लिए प्रतिबद्ध है। उधर, टीएमसी ने इस दौरे को महज एक चुनावी स्टंट करार दिया है।

क्या चुनाव में गेमचेंजर बनेगा यह दौरा?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पीएम मोदी का मतुआ मंदिर जाना केवल धार्मिक नहीं, बल्कि एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति है। 2019 और 2021 के बाद एक बार फिर मोदी का मतुआ समुदाय के बीच पहुंचना बीजेपी की पैठ को और मजबूत कर सकता है। ठाकुरनगर में उमड़ा जनसैलाब इस बात का संकेत है कि नागरिकता का मुद्दा एक बार फिर बंगाल चुनाव में सबसे बड़ा गेमचेंजर साबित हो सकता है।

अब सबकी नजरें 4 मई को होने वाले मतदान पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि बड़ो मां के प्रति पीएम की यह श्रद्धा और नागरिकता का यह वादा बीजेपी की सत्ता की राह को कितनी आसान बनाता है।

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