फर्जी जाति प्रमाणपत्र और मराठी भाषा: सहर शेख का विवादों से पुराना नाता
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मुंबई: ठाणे की मुंब्रा सीट से एआईएमआईएम (AIMIM) की पार्षद सहर शेख एक बार फिर विवादों के घेरे में हैं। फर्जी जाति प्रमाणपत्र के गंभीर आरोपों पर सफाई देने के लिए आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में सहर शेख ने न केवल खुद को बेगुनाह बताया, बल्कि मराठी भाषा बोलने से इनकार कर एक नए विवाद को जन्म दे दिया है।

आरोपों पर क्या बोलीं सहर शेख?

प्रेस कॉन्फ्रेंस में सहर शेख ने अपने ऊपर लगे फर्जी ओबीसी प्रमाणपत्र के आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित हैं। उनके पिता युनूस शेख ने तहसीलदार कार्यालय से जारी मूल दस्तावेज मीडिया के सामने पेश किए और कहा कि उनके पास हर सवाल का कानूनी जवाब है।

मराठी भाषा पर छिड़ा नया विवाद

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब सहर शेख से मराठी में बोलने का आग्रह किया गया, तो उन्होंने साफ कह दिया कि वे मराठी नहीं बोल सकतीं। उन्होंने तर्क दिया कि उनकी मराठी कमजोर है और वे किसी भी शब्द को गलत तरीके से बोलकर भाषा की अस्मिता का अपमान नहीं करना चाहतीं।

हालांकि, बाद में उनका लहजा सख्त हो गया। उन्होंने स्पष्ट किया, आप मुझे जबरन मराठी बोलने के लिए मजबूर नहीं कर सकते। मेरी मराठी अच्छी नहीं है, इसलिए मैं हिंदी में बात कर रही हूं। इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर एक नई बहस छिड़ गई है।

राजनीतिक रंजिश का दावा

सहर शेख ने अपने राजनीतिक विरोधियों पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें फरार घोषित किया गया और उन पर बेबुनियाद आरोप लगाए गए। उन्होंने कहा, मैं संविधान को मानने वाली हूं और इस लड़ाई को कानूनी तौर पर लडूंगी।

उन्होंने शिकायतकर्ता को चेतावनी देते हुए कहा, मैं उन्हें कोर्ट में देखूंगी। वहीं, उनके पिता ने दावा किया कि उनकी बेटी के खिलाफ साजिश रची जा रही है क्योंकि उन्होंने चुनाव में बड़े नेताओं को मात दी है।

सुनवाई प्रक्रिया पर उठाए सवाल

सहर शेख ने इस पूरे मामले की सुनवाई प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि तहसीलदार उमेश पाटील के खिलाफ जिलाधिकारी कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई गई है। सहर शेख का कहना है कि सुनवाई के दौरान अधिकारियों ने नियमों का पालन नहीं किया और जो जानकारी मांगी गई थी, वह भी गलत दी गई।

उन्होंने इस बात पर भी हैरानी जताई कि उन्हें गाजियाबाद का निवासी बताया जा रहा है, जबकि उनकी पूरी पढ़ाई-लिखाई ठाणे में ही हुई है। अब देखना यह है कि कानूनी लड़ाई के इस मोड़ पर प्रशासन का अगला रुख क्या होता है।

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