फांसी के फंदे पर 8 बेटियां: डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से की अपील, इन्हें रिहा करो, तो शुरू होगी सकारात्मक बातचीत
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ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के बीच एक मानवीय मुद्दा गहरा गया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से आठ महिलाओं को फांसी न देने की सार्वजनिक अपील की है। ट्रंप का मानना है कि इन महिलाओं को जीवनदान देकर ईरान अमेरिका के साथ संबंधों में एक नई और सकारात्मक शुरुआत कर सकता है।

ट्रंप की ट्रुथ सोशल पर सीधी अपील

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर ईरानी नेताओं को संदेश भेजा है। उन्होंने लिखा, ईरानी नेताओं से, जो जल्द ही मेरे प्रतिनिधियों से बातचीत करेंगे, मेरी अपील है कि वे इन महिलाओं को रिहा करें। उन्हें कोई नुकसान न पहुंचाएं। यह हमारी भावी बातचीत के लिए एक शानदार शुरुआत होगी।

कौन हैं वो 8 महिलाएं?

जिन महिलाओं पर फांसी की तलवार लटकी है, उनमें पनाह मोवाहेदी, बीता हेम्मती, महबूबा शबानी, एनसिए नेजाती, गजल घालंदरी, डायना ताहेरबादी, गुलनाज नाराघी और वीनस हुसैननेजाद शामिल हैं। ये सभी महिलाएं इस साल की शुरुआत में ईरान में हुए सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान गिरफ्तार की गई थीं।

गंभीर आरोप और जबरन इकबालिया बयान

इन महिलाओं पर अलग-अलग गंभीर आरोप लगाए गए हैं। 33 वर्षीय महबूबा शबानी पर घायल प्रदर्शनकारियों की मदद करने का आरोप है, जबकि 16 वर्षीय डायना ताहेरबादी पर ईश्वर के खिलाफ युद्ध छेड़ने का आरोप है, जिसके लिए ईरान में मौत की सजा का प्रावधान है। वहीं, पेशे से डॉक्टर गुलनाज नाराघी और वीनस हुसैननेजाद को हिरासत में लेकर जबरन इकबालिया बयान दर्ज कराने के आरोप सामने आए हैं।

मानवाधिकार संगठनों की चिंता

विपक्षी संगठन नेशनल काउंसिल ऑफ रेजिस्टेंस ऑफ ईरान (NCRI) का दावा है कि बीता हेम्मती सहित कई महिलाओं पर विस्फोटक रखने और राष्ट्रीय सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने जैसे संगीन इल्जाम मढ़े गए हैं। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का आरोप है कि ईरान सरकार प्रदर्शनकारियों को कुचलने के लिए ढोंग भरे मुकदमों (sham trials) का सहारा ले रही है।

ईरान में बढ़ता दमन

आंकड़ों पर गौर करें तो स्थिति चिंताजनक है। ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी के अनुसार, हालिया प्रदर्शनों के बाद ईरान में 50,000 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है। वहीं, NCRI का अनुमान है कि इस साल के पहले महीने में ही 300 से अधिक लोगों को फांसी दी जा चुकी है। ट्रंप की यह अपील अब अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के साथ-साथ मानवाधिकारों के एक बड़े सवाल में तब्दील हो गई है।

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