ऑपरेशन सिंदूर: L-70 गनों की गर्जना से थर्राया दुश्मन, भारतीय सेना का दो टूक संदेश- हर वार का हिसाब होगा
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गुजरात: ऑपरेशन सिंदूर की पहली बरसी पर भारतीय सेना ने अपनी सैन्य ताकत का ऐसा प्रदर्शन किया, जो न केवल यादों को ताजा कर गया, बल्कि दुश्मन के लिए एक चेतावनी भी है। गुजरात के भुज में आयोजित युद्धाभ्यास में L-70 एयर डिफेंस गन की गर्जना ने यह साफ कर दिया कि भारतीय आसमान अब अभेद्य है।

आसमान पर अजेय नियंत्रण पिछले साल इसी ऑपरेशन के दौरान, L-70 गनों ने दुश्मन के ड्रोन हमलों को हवा में ही ढेर कर दिया था। आज, एक साल बाद भी, ये गन भारतीय सुरक्षा की रीढ़ बनी हुई हैं। इस अभ्यास में न केवल गन पावर दिखी, बल्कि आधुनिक ड्रोन, रियल-टाइम सर्विलांस और सटीक इंटेलिजेंस सिस्टम का भी सामंजस्य देखने को मिला।

पहलगाम का घाव और निर्णायक प्रहार मई 2025 में पहलगाम हमले के बाद शुरू हुआ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ भारत की बदली हुई सैन्य नीति का प्रतीक है। उस समय भारत ने केवल प्रतिक्रिया नहीं दी, बल्कि सीमा पार आतंकी ठिकानों पर 15 दिन के भीतर चुन-चुनकर प्रहार किया। लश्कर, जैश और हिजबुल जैसे संगठनों की कमर तोड़ने वाली वह कार्रवाई आज भी दुश्मन के रोंगटे खड़ा कर देती है।

जमीन से पानी तक, हर जगह मुस्तैद युद्धाभ्यास में केवल गनों का प्रदर्शन नहीं था, बल्कि उथले क्रीक इलाकों में कमांडोज की फुर्ती और असॉल्ट बोट्स की तैनाती ने यह साबित किया कि भारतीय सेना किसी भी भौगोलिक स्थिति में युद्ध का रुख मोड़ने में सक्षम है। T-72 टैंक और 130mm आर्टिलरी की गड़गड़ाहट ने सेना की सर्वव्यापी तैयारी को प्रदर्शित किया।

भारत कभी आतंक के सामने नहीं झुकेगा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर राष्ट्र के संकल्प को दोहराया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत आतंकवाद के आगे कभी घुटने नहीं टेकेगा। एडीजी पीआई का संदेश भी उतना ही सख्त था— भारत के खिलाफ की गई हर कार्रवाई का जवाब तय है, न्याय होगा और हर बार होगा।

रणनीति का नया अध्याय ऑपरेशन सिंदूर केवल एक सैन्य अभियान नहीं, बल्कि भारत की प्रो-एक्टिव डिफेंस पॉलिसी का नया अध्याय है। पिछले साल ड्रोन हमलों और गोलाबारी के जवाब में भारतीय सेना ने लाहौर और गुजरांवाला के पास जिन सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया था, उनकी यादें आज भी दुश्मन को सीमा पर कोई भी नापाक हरकत करने से पहले हजार बार सोचने पर मजबूर करती हैं।

आज एक साल बाद, ऑपरेशन सिंदूर भारतीय सेना के उस संकल्प का जीवित प्रमाण है, जहाँ वीरता केवल युद्ध के मैदान में नहीं, बल्कि कूटनीति और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता में भी दिखाई देती है। भारत अब केवल सुरक्षा नहीं करता, बल्कि इतिहास लिखता है।

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