अहमदाबाद: मशहूर आईवियर कंपनी लेंसकार्ट एक बड़े विवाद में फंस गई है। कंपनी के एक पूर्व कर्मचारी जील सोगसिया ने आरोप लगाया है कि धार्मिक प्रतीकों, जैसे कि तिलक और शिखा (चोटी), को हटाने से इनकार करने पर उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया। इस दावे के बाद कंपनी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
वीडियो से मचा हड़कंप जील सोगसिया ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर पूरी घटना का ब्योरा दिया है। उन्होंने दावा किया कि कंपनी के ड्रेस कोड और ग्रूमिंग स्टैंडर्ड्स के नाम पर उनसे हिंदू धार्मिक प्रतीकों को हटाने के लिए कहा गया था। सोगसिया के अनुसार, जब उन्होंने अपनी पहचान से समझौता करने से मना कर दिया, तो उन्हें कंपनी के प्रोग्राम से बाहर कर दिया गया।
आनंद रंगनाथन ने किया समर्थन लेखक और विश्लेषक डॉ. आनंद रंगनाथन ने सोगसिया का वीडियो अपने एक्स (ट्विटर) हैंडल पर शेयर किया है। उन्होंने इसे सरासर भेदभाव और कट्टरता करार दिया है। रंगनाथन ने लेंसकार्ट के सीईओ पीयूष बंसल को टैग करते हुए मांग की है कि सोगसिया को वापस बुलाकर दोबारा नौकरी पर रखा जाए।
क्या है सोगसिया का दावा? सूरत के रहने वाले सोगसिया ने बताया कि 10 दिसंबर 2025 को उन्हें ट्रेनिंग के लिए बुलाया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रेनिंग हेड नर्गिस ने उन्हें साफ कहा था कि कंपनी के ग्रूमिंग स्टैंडर्ड्स का पालन करना अनिवार्य है, जिसमें तिलक और चोटी जैसी चीजें हटाने का दबाव बनाया गया। सोगसिया के इनकार के बाद उन्हें ट्रेनिंग से निकाल दिया गया।
पहले भी विवादों में रही है कंपनी यह कोई पहला मौका नहीं है जब लेंसकार्ट ड्रेस कोड को लेकर विवादों में आई है। हाल ही में कंपनी का एक आंतरिक दस्तावेज लीक हुआ था, जिसमें बिंदी और तिलक पर कथित प्रतिबंध और हिजाब जैसी चीजों को लेकर सोशल मीडिया पर कोहराम मच गया था।
पीयूष बंसल की सफाई पुराने विवाद के तूल पकड़ने पर लेंसकार्ट के फाउंडर पीयूष बंसल ने सफाई दी थी। उन्होंने स्पष्ट किया था कि वह वायरल दस्तावेज गलत था और कंपनी की मौजूदा गाइडलाइंस को नहीं दर्शाता है। हालांकि, सोगसिया के नए आरोपों ने एक बार फिर कंपनी की नीतियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल कंपनी की ओर से इस नए मामले पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं आई है।
I was ordered by @Lenskart_com to cut my shikha and remove my tilak. When I refused to do so, I was fired. - Zeel Soghasia
— Anand Ranganathan (@ARanganathan72) April 18, 2026
This is blatant discrimination and bigotry that goes beyond adhering to some internal memo. Mr Soghasia must be recalled and reinstated. @peyushbansal pic.twitter.com/V4UANQE2Q1
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